वेदांत जीने का विज्ञान है : डॉ. कर्ण सिंह

माधोदास मूँधड़ा स्मृति व्याख्यानमाला के तीसरे आयोजन में पहुंचे डॉ. कर्ण सिंह
Kolkata
डॉ. कर्ण सिंह
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कोलकाता : भारतीय विद्या मंदिर एवं भारतीय संस्कृति संसद के संयुक्त तत्वावधान में सेठ माधोदास मूँधड़ा स्मृति व्याख्यानमाला के तीसरे आयोजन का रविवार को आभासी माध्यम से आयोजन हुआ। कार्यक्रम में पद्म विभूषण डॉ. कर्ण सिंह ने बीज वक्तव्य देते हुए वेदांत को जीवन जीने का विज्ञान बताया।

डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि व्यक्ति को सबसे पहले अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उपनिषदों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा को ब्रह्म का प्रतिबिंब माना गया है। उन्होंने ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग और राजयोग के महत्व को समझाते हुए कहा कि जब कोई कर्म ईश्वर को समर्पित भाव से किया जाता है, तो वह कर्मयोग का स्वरूप ले लेता है।

97 वर्ष की आयु में डॉ. कर्ण सिंह ने करीब आधे घंटे तक वेदांत जैसे गंभीर विषय को सहज और सरल शैली में प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने ऑनलाइन जुड़े श्रोताओं को प्रभावित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत संस्था की उपाध्यक्षा डॉ. तारा दूगड़ ने की और उन्होंने डॉ. कर्ण सिंह का परिचय दिया। संस्थाध्यक्ष डॉ. विट्ठल दास मूँधड़ा ने स्वागत भाषण में डॉ. कर्ण सिंह के जम्मू-कश्मीर के प्रथम एवं अंतिम सदर-ए-रियासत के रूप में दिए गए योगदान का उल्लेख किया। मुख्य ट्रस्टी राजगोपाल सुरेका ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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