

कोलकाता : कोलकाता और आसपास के इलाकों की हाउसिंग सोसायटियों में इस बार दुर्गापूजा केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक विरासत और विश्व शांति का संदेश भी दे रही है।
दक्षिण बाईपास से लेकर न्यू टाउन और राजारहाट तक, विभिन्न आवासीय परिसरों ने ऐसे विषय चुने हैं, जो मोबाइल की बढ़ती लत, किताबों से दूरी, पारंपरिक कला के संरक्षण और वैश्विक सद्भाव जैसे मुद्दों को सामने लाते हैं। जानकारी के अनुसार, इन आयोजनों में बच्चों और बुजुर्गों की भागीदारी भी खास आकर्षण है।
मोबाइल की लत के खिलाफ जागरूकता, किताबों से जुड़ने का संदेश
दक्षिण बाईपास स्थित साउथ विंड्स हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में इस वर्ष की पूजा की थीम ‘पिक्सल टू पुथी’ (Pixel to Puthi) रखी गई है। इसका उद्देश्य मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोगों में पढ़ने की आदत कम होने की समस्या को उजागर करना है।
वहीं, न्यू टाउन के सनराइज सिम्फनी में ‘मोबाइल फोन एंड डिजिटल स्क्रीन: द न्यू असुर’ विषय के जरिए डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल के दुष्प्रभावों पर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। इस दौरान बच्चे पंडाल की सजावट, अल्पना और पारंपरिक कलाकृतियों को तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
चलचित्र कला के जरिए बंगाल की विरासत को सहेजने की पहल
राजारहाट स्थित सिद्धा पाइन्स में ‘द सागा ऑफ चलचित्र’ थीम के माध्यम से बंगाल की पारंपरिक चालचित्र कला को फिर से पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े मानव मेहरा के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को इस कला के इतिहास, शिल्प और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना है, ताकि इसकी विरासत आगे भी कायम रहे।
विश्व शांति और उत्तम कुमार की जन्मशताब्दी भी पूजा के आकर्षण
न्यू टाउन के संजीवा टाउन में ‘मायेर आंचोले बिश्व शांति’ थीम के जरिए विश्व शांति का संदेश दिया जाएगा। यहां पंडाल को ग्लोब के आकार में तैयार कर साड़ी के बड़े आंचल से ढकने की योजना है। यहाँ पंचमी के दिन दादा-दादी और नाना-नानी के लिए विशेष वॉक भी आयोजित होगी।
वहीं, साउथ सिटी आवासीय परिसर में महानायक उत्तम कुमार की जन्मशताब्दी को पूजा का केंद्र बनाया गया है। महालया से शुरू हुए संगीत कार्यक्रम और नृत्य-नाटिकाएं पूरे दुर्गोत्सव के दौरान जारी रहेंगी। इस तरह, आवासीय परिसरों की दुर्गापूजा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का मंच बन रही है।
कहीं डिजिटल लत से दूर रहने का संदेश है, तो कहीं पारंपरिक कला, विश्व शांति और सिनेमा की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल की जा रही है।