गाय की महत्ता समझना खुशहाल राष्ट्र के लिए जरूरी : गोविंददेव गिरिजी महाराज

भागवत कथा अमृत के समान, इससे मिटता है जन्म-मरण का कष्ट
Kolkata
गोविंददेव गिरिजी महाराज
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कोलकाता : गाय की महत्ता को समझना समाज और राष्ट्र दोनों के हित में बेहद जरूरी है। गौमाता चलता-फिरता अस्पताल और मंदिर है। गाय के महत्व की अनदेखी से न समाज का कल्याण संभव है और न ही राष्ट्र का। यह विचार राष्ट्र संत स्वामी श्री गोविंददेव गिरिजी महाराज ने शुक्रवार को सात दिवसीय श्रीमद् भागवत पुराण कथा के पांचवें दिन व्यक्त किए।

गोलाघाटा स्थित डीबीनीटी पैवेलियन (वीआईपी रोड) में श्री दाधीच परिषद (कोलकाता) की ओर से गंगासागर धाम में भवन निर्माण प्रकल्प के लिए आयोजित कथा में उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनाया।

भागवत कथा अमृत के समान, इससे मिटता है जन्म-मरण का कष्ट

व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए गोविंददेव गिरिजी महाराज ने कहा कि भागवत कथा से बड़ा कोई सत्य नहीं है। यह अमृत के समान है और इसका श्रवण करने वाला व्यक्ति भी अमृत तुल्य हो जाता है।

भागवत कथा ऐसी आध्यात्मिक औषधि है, जो मनुष्य को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि सच्चा सुख न धन में है और न ही केवल शिक्षा में। वास्तविक आनंद भगवान के चरणों में शरणागत होने और जीवन में प्रेम अर्जित करने से मिलता है।

श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा का प्रसंग

महाराजश्री ने बताया कि जब पृथ्वी पर असुरों और राक्षसों का अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान विष्णु विभिन्न अवतार लेकर पृथ्वी का भार कम करते हैं। उनके अवतारों में श्रीराम और श्रीकृष्ण का विशेष महत्व है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने गोपियों की भक्ति और उनके कृष्ण प्रेम का उल्लेख किया।

उन्होंने पूतना उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान की कृपा से उनका वध करने आई पूतना का भी उद्धार हो गया, क्योंकि वह मां का रूप लेकर आई थी। भगवान की लीला में प्रवेश के लिए मनुष्य को अविद्या रूपी पूतना का नाश करना जरूरी है।

अहंकार पतन का कारण, जीवन में प्रेम को दें महत्व

गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाते हुए स्वामीजी ने कहा कि इंद्र का अहंकार दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से गोवर्धन पूजा कराई। अहंकार हमेशा पतन का रास्ता खोलता है। यदि अहंकार करना ही है तो गोविंद का होना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम, भक्ति और विनम्रता को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर स्वामी उमेशानंद गिरिजी महाराज (वृंदावन), जगदीश माहेश्वरी, शिवदयाल ईनाणिया, रतनलाल ओझा, नकुल व्यास, अरुण मल्लावत, नंद कुमार लड्ढा, बृजमोहन बेरीवाल, कन्हैयालाल बेरीवाल, निखिल मुसद्दी, आशीष मातादीन शर्मा, अनिल दाधीच (बोकारो), एडवोकेट रामदेव काकड़ा, चंद्रप्रकाश शर्मा, अमित शर्मा, जुगल कोटरीवाल और राजेश सोमानी अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

आयोजन में नवीन जोशी, अर्पित शर्मा, सुभाष दाधीच, रामेश्वर लाल रतावा, पंडित रामप्रसाद जोशी, मन्नालाल शर्मा, पंडित सहज नारायण शर्मा और सुनील दाधीच ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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