सुंदरबन की चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट की दो शिशु देखभालकर्मियों को राष्ट्रीय सम्मान

सुंदरबन की चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट की दो शिशु देखभालकर्मियों को राष्ट्रीय सम्मान
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के कुलतली में चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट की ‘कवच’ पहल से जुड़ीं दो शिशु देखभालकर्मियों मंजू प्रधान और सोनामणि हालदार को छोटे बच्चों की देखभाल और सुरक्षा में उनके योगदान के लिए यहाँ आयोजित इंडिया चाइल्डकेयर चैंपियन अवार्ड्स में देश की सर्वश्रेष्ठ क्रेच कर्मियों में सम्मानित किया गया।

एक स्वतंत्र निर्णायक प्रक्रिया के बाद चुने गए १४ देखभालकर्मियों में ये दोनों शामिल थीं। अंतरराष्ट्रीय देखभाल एवं सहायता दिवस के अवसर पर ग्लोबल अलायंस फॉर केयर और यूएन वीमेन इंडिया के साथ साझेदारी में फोर्सेस (फोरम फॉर क्रेचेस एंड चाइल्डकेयर सर्विसेज) ने इस समारोह का आयोजन किया।

अभिनेत्री और निर्माता ऋचा चड्ढा ने उपस्थित जनों को संबोधित किया और पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। उपस्थित लोगों में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. रश्मि सिंह (आईएएस), न्यायमूर्ति गीता मित्तल (सेवानिवृत्त) और यूएन वीमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा शामिल थीं।

चर्चा का केंद्र शिशु देखभाल सेवाओं को मज़बूत करना, प्रशिक्षण में सुधार करना तथा देखभालकर्मियों के लिए उचित पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा और करियर के अवसर सुनिश्चित करना रहा।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की वित्तीय सहायता से चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट द्वारा क्रियान्वित ‘कवच’ सुंदरबन में पर्यवेक्षित शिशु देखभाल केंद्र उपलब्ध कराता है, जहाँ तालाब और अन्य खुले जलाशय छोटे बच्चों के लिए डूबने का जोखिम पैदा करते हैं। यह पहल शिशु देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा को इन खतरों के प्रति बच्चों के संपर्क को कम करने वाले उपायों के साथ जोड़ती है।

प्रधान और हालदार रोज़ बच्चों की देखभाल करती हैं और बच्चों को सुरक्षित रखने में परिवारों को भी जोड़ती हैं। उनका यह सम्मान चोटों की रोकथाम और बच्चों के विकास में प्रशिक्षित सामुदायिक देखभालकर्मियों की भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित करता है।

“देखभाल ऐसा कार्य है जो जीवन की रक्षा करता है, बच्चों का पोषण करता है और परिवारों को आजीविका कमाने में सक्षम बनाता है; इसे करने वाले गरिमा, उचित वेतन और मान्यता के हकदार हैं,” यह बात चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट के इंजरी प्रिवेंशन एवं राष्ट्रीय एडवोकेसी प्रमुख सुजॉय रॉय ने कही।

रॉय ने कहा कि संस्था महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (भारत सरकार) की गुणवत्तापूर्ण क्रेच सेवाओं की योजना ‘पालना’ को लागू करने में पश्चिम बंगाल सरकार का सहयोग करने के लिए ‘कवच’ के अपने अनुभव का उपयोग करने को तैयार है।

उन्होंने कहा कि चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट का मौजूदा समुदाय-आधारित शिशु देखभाल कार्य ऐसे सहयोग के लिए एक व्यावहारिक आधार प्रदान करता है, विशेष रूप से सामुदायिक लामबंदी, देखभालकर्मियों के प्रशिक्षण, बाल सुरक्षा और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के क्षेत्रों में।

चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट ने प्रधान और हालदार को बधाई दी तथा उनके परिवारों और उन समुदायों के सहयोग को स्वीकार किया, जिनकी वे सेवा करती हैं।

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