

कोलकाता : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पहले एक व्यक्ति से 45 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इसके बाद ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर उसे निकालने वाले गिरोह का कोलकाता पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में चेतला थाने की पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किये गये आरोपितों की पहचान सागर शर्मा और विशाल गुप्ता के रूप में हुई है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, जनवरी के दूसरे सप्ताह में साइबर ठगों ने चेतला इलाके के एक वृद्ध को फोन किया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि वृद्ध के आधार नंबर का इस्तेमाल एक आतंकी संगठन ने सिम कार्ड लेने और आपसी बातचीत के लिए किया है। ठग ने यह भी कहा कि उसी सिम कार्ड के जरिए कई धमाकों को अंजाम दिया गया है और जांच में वृद्ध की संलिप्तता सामने आयी है। आरोपितों ने वृद्ध को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किए जाने की बात कहकर डराया और उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने का निर्देश दिया। घबराये वृद्ध ने खुद को घर में ही सीमित कर लिया। इसके बाद ठगों ने कहा कि यदि वह इस मामले से बचना चाहते हैं तो उन्हें रुपये भेजने होंगे, तभी उन्हें राहत मिलेगी। मजबूरी में वृद्ध ने आरोपितों द्वारा बताये गये खाते में किस्तों में कुल 45 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिये। इसके बावजूद जब ठगों ने और रुपयों की मांग की तो वृद्ध को संदेह हुआ। परिचितों से सलाह लेने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने चेतला थाने में शिकायत दर्ज करायी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जिस खाते में पीड़ित ने पैसे भेजे थे, वहां से रकम अन्य खातों में ट्रांसफर की गयी। लेनदेन की कड़ी खंगालते हुए पुलिस बड़ाबाजार इलाके तक पहुंची और वहां रहने वाले सागर शर्मा व विशाल गुप्ता को चिह्नित किया। पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने ठगी की रकम को अधिक मुनाफे के लिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया और कथित तौर पर इसे विदेशों में ट्रांसफर किया। चेतला थाना पुलिस ने बड़ाबाजार में छापेमारी कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों से पूछताछ कर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए धन की हेराफेरी और विदेशों में पैसे भेजने से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।