ब्रिगेड में शहीद दिवस नहीं, तृणमूल ने दिया स्पष्ट संदेश

21 जुलाई की सभा को लेकर पलटवार, भाजपा पर निशाना
ब्रिगेड मैदान
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कोलकाता: 21 जुलाई के शहीद दिवस समारोह को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में टकराव और तेज हो गया है। कालीघाट तृणमूल ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अपनी पारंपरिक शहीद दिवस रैली के आयोजन स्थल में कोई बदलाव नहीं करेगी और ब्रिगेड मैदान में सभा कराने के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करती है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी कानूनी प्रक्रिया और परंपरा का पालन करते हुए प्रशासन से अनुमति मांगी गई है।

कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि ब्रिगेड में समानांतर कार्यक्रम कराने की कोशिश भाजपा समर्थित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी खेमे को "भाजपा की बी-टीम" बताते हुए कहा कि जुलाई की भारी बारिश के बीच ब्रिगेड मैदान में विशाल जनसभा आयोजित करना व्यावहारिक नहीं है।

उन्होंने 2011 में वहां हुए जलभराव का हवाला देते हुए कहा कि बारिश तृणमूल के लिए शुभ हो सकती है, लेकिन घुटनों तक पानी और कीचड़ में सभा करना जनता के लिए उचित नहीं होगा। उनका आरोप था कि भाजपा जानबूझकर शहीद दिवस कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश कर रही है।

कुणाल घोष ने तृणमूल छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने विशेष रूप से सुदीप बंद्योपाध्याय का नाम लेते हुए उन्हें "विश्वासघाती" बताया और आरोप लगाया कि भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए ऐसे नेताओं को संरक्षण दे रही है। उनके अनुसार, जिन नेताओं ने तृणमूल के टिकट पर जीत हासिल की, वही अब पार्टी छोड़कर भाजपा समर्थित राजनीति का हिस्सा बन गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 21 जुलाई का शहीद दिवस अब केवल एक स्मृति समारोह नहीं, बल्कि तृणमूल की आंतरिक खींचतान, बागी नेताओं की सक्रियता और भाजपा के साथ बढ़ते राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख प्रतीक बनता जा रहा है।

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