लिफाफा चिह्न ऋतब्रत गुट को मिलने पर भड़के नौसाद

आईएसएफ के विधायक नौसाद सिद्दीकी
आईएसएफ के विधायक नौसाद सिद्दीकी
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दक्षिण 24 परगना: भांगड़ से इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौसाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग द्वारा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और उसके 28 साल पुराने दलीय प्रतीक को फ्रीज किए जाने के फैसले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राजनीतिक रूप से तृणमूल कांग्रेस के प्रखर विरोधी होने के बावजूद, सिद्दीकी ने इस फैसले को लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए एक प्रतिकूल और चिंताजनक लक्षण करार दिया है। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि तृणमूल के प्रतीक के फ्रीज होने पर भले ही सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में ट्रॉलिंग चल रही हो और लोग इसे तृणमूल के कर्मों का फल बता रहे हों, लेकिन वे इस फैसले से न तो खुश हैं और न ही उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे दलीय प्रतीक को इस प्रकार अधर में लटकाना लोकतंत्र के लिए एक गलत मिसाल कायम कर सकता है, जो भविष्य में अन्य दलों के लिए भी हानिकारक साबित होगा। 'लिफाफा' चिह्न ऋतब्रत गुट तृणमूल को मिलने से नाराजगी, कानूनी लड़ाई का ऐलान इसके साथ ही नौसाद सिद्दीकी ने आईएसएफ के पारंपरिक चुनाव चिह्न ' लिफाफा' को ऋतब्रत तृणमूल गुट को आवंटित किए जाने पर तीव्र असंतोष और नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इसे पार्टी के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि अपनी पहचान और प्रतीक की रक्षा के लिए वे आने वाले दिनों में अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और इसके खिलाफ जोरदार कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। बातचीत के दौरान उन्होंने कालीघाट तृणमूल द्वारा नंदीग्राम विधानसभा सीट से उम्मीदवार पद को वापस (विथड्रॉ) लिए जाने के घटनाक्रम पर भी गहरा रोष व्यक्त किया।

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