

कोलकाता : एक महिला के घर में तोड़फोड़, आगजनी, जान से मारने की धमकी देने और जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के पार्षद बाप्पादित्य दासगुप्ता को 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
इससे पहले शनिवार शाम पुलिस ने मामले में पार्षद के सहयोगी और तृणमूल नेता सौरव घोष को गिरफ्तार किया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घोष से पूछताछ के दौरान बाप्पादित्य दासगुप्ता का नाम सामने आया, जिसके बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। वहीं, रविवार सुबह अदालत में पेशी के लिए थाने से बाहर लाए जाने के दौरान कुछ लोगों ने बाप्पादित्य पर अंडे भी फेंके। रविवार को अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील सौरिन घोष ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने, घटनास्थल का पुनर्निर्माण करने तथा अपराध से जुड़े व्यापक षड्यंत्र के पहलुओं का खुलासा करने के लिए अभियुक्तों की पुलिस हिरासत आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता महिला पेशे से वकील हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद उनके घर में तोड़फोड़ की गई थी और उन्हें लगातार धमकियां दी गई थीं। महिला का दावा है कि इलाके में कार्यालय खोलने के बदले उनसे 20 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि उनसे दो लाख रुपये की जबरन वसूली भी की गई थी। शेष राशि नहीं देने पर उनके घर में तोड़फोड़ की गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बाप्पादित्य दासगुप्ता पाटुली और वैष्णवघाटा क्षेत्र के प्रभावशाली तृणमूल नेता माने जाते हैं और कभी पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के करीबी सहयोगी रहे हैं। उनके खिलाफ पहले भी जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और चुनाव बाद हुई हिंसा में संलिप्तता के आरोप लगते रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अतीत में सीबीआई ने भी एक भ्रष्टाचार के मामले में उनसे पूछताछ की थी, हालांकि उस समय कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी।