

कोलकाता : सरकारी कार्यक्रमों में गेरुआ रंग के कारपेट के इस्तेमाल को लेकर बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने सरकारी आयोजनों में गेरुआ कारपेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया है। दिलचस्प बात यह हैं कि जिस गेरुआ रंग को भाजपा अपनी राजनीतिक पहचान और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करती रही है, अब सरकारी आयोजनों में उसके इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।
तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा कि गेरुआ एक पवित्र रंग है। ऐसे में जूते पहनकर उसके ऊपर चलना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि हाल के कुछ सरकारी कार्यक्रमों में भाजपा के नेता और मंत्री गेरुआ कारपेट पर चलते नजर आये। कुणाल ने राज्य सरकार से सभी डेकोरेटरों को स्पष्ट निर्देश जारी करने तथा गेरुआ कारपेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि गेरुआ रंग अपनी महिमा के साथ रहे, लेकिन इसे लेकर राजनीति बंद होनी चाहिए। उनके मुताबिक सरकारी आयोजनों में गेरुआ कारपेट का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। वहीं, प्रदेश कांग्रेस नेता आशुतोष चट्टोपाध्याय ने भी इस मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि तिरंगे के चार रंगों में गेरुआ भी शामिल है और उसका सम्मान होना चाहिए। इस मुद्दे ने सरकारी आयोजनों में रंगों के इस्तेमाल और उनके राजनीतिक-सांस्कृतिक अर्थ को लेकर नयी बहस छेड़ दी है।