

कोलकाता : 34 वर्षीय एक मछुआरे की एक हादसे में असामयिक मौत के बाद उसके परिवार ने ऐसा फैसला लिया, जिससे तीन जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है। ब्रेन डेड घोषित किए गए सुंदरवन के मछुआरे के अंगों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। उसके लीवर और दोनों किडनी जरूरतमंद मरीजों को दान की गईं।
अंग प्रत्यारोपण के लिए समय पर अंगों को निकालने और उन्हें संबंधित मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद लीवर और दोनों किडनी का अलग-अलग मरीजों में सफल प्रत्यारोपण किया गया।
काकद्वीप के रहने वाले सुबोध दास के परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल समय था, लेकिन गहरे दुख के बीच अंगदान का फैसला लेकर उन्होंने तीन लोगों के जीवन को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अंगदान के जरिए किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसके अंग दूसरे लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकते हैं।
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन डेथ के बाद समय पर अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में भी समय पर समन्वय के कारण दान किए गए अंगों का जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचा कर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण संभव हो सका।