

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
सागर: गंगासागर मेला इस बार केवल आस्था का 'मिलन तीर्थ' नहीं, बल्कि सतर्कता और समझदारी का भी प्रतीक बनकर उभरा है। देश के विभिन्न हिस्सों से हज़ारों श्रद्धालु संभावित भीड़ से बचने के लिए पहले ही गंगासागर पहुंचने लगे हैं, जबकि मेला का शुरुआत 9 जनवरी से तय है। इसका एक बड़ा कारण पिछले वर्ष प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान हुई दुखद भगदड़ की घटना है, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को अंदर ही अंदर झकझोर दिया था।
राजस्थान के भीलवाड़ा से सपरिवार गंगासागर आये तुलाराम मीणा कहते हैं, “हम हर साल गंगासागर और कुंभ में पवित्र स्नान के लिए आते हैं। लेकिन पिछले साल प्रयागराज में जो हुआ, उसने हमें डरा दिया। आस्था अपनी जगह है, लेकिन जान की सुरक्षा सबसे जरूरी है।” उनके साथ आए गुजरात के अहमदाबाद निवासी महेंद्र पटेल भी इसी भाव को दोहराते हैं। वे कहते हैं, “उस हादसे ने हमें बेबस कर दिया था। तभी तय किया कि इस बार भीड़ से पहले ही पहुंचेंगे।” बिहार के नवादा से आए सूर्य प्रताप सिंह बताते हैं कि समय से पहुंचने का फैसला सही साबित हुआ। “यहां व्यवस्थाएं बेहतर हैं, भीड़ नियंत्रित है और प्रशासन सहयोगी है। स्नान और दर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हो पा रहे हैं,” वे कहते हैं।
प्रशासनिक हलकों का मानना हैं कि गंगासागर में इस बार राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और गुजरात से आए श्रद्धालुओं की संख्या खास तौर पर अधिक देखी जा रही है, जो कि आनेवाले एक हफ्तों में 5 गुना बढ़ सकती हैं। उनका यह भी कहना है कि इस साल गंगासागर में 5 लाख से अधिक लोगों की आने का संभावना है। हालांकि अधिकांश श्रद्धालु मानते हैं कि समय से पहले पहुंचकर न केवल भीड़ से बचा जा सकता है, बल्कि आस्था के इस महापर्व का अनुभव भी अधिक सुकून भरा होता है।
प्रशासन की ओर से परिवहन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है। जगह-जगह स्वयंसेवक और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिससे श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन मिल रहा है। इसका असर यह है कि श्रद्धालु खुलकर प्रशासन और प्रबंधन की सराहना कर रहे हैं। प्रयागराज की घटना ने भले ही श्रद्धालुओं को सतर्क कर दिया हो, लेकिन गंगासागर में सुव्यवस्थित इंतजामों ने उनका भरोसा फिर मजबूत किया है। आस्था, सुरक्षा और संतुलन—तीनों के मेल से इस बार गंगासागर मेला एक नई मिसाल गढ़ता दिख रहा है।