

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आरटीआई के जवाब में स्पष्ट किया है कि फिलहाल स्कूलों की पीएम-पोषण (मिड-डे मील) योजना का संचालन इस्कॉन को सौंपने का कोई स्वीकृत प्रस्ताव नहीं है। इसे उन्होंने "बंगाल के बच्चों की बड़ी जीत" करार दिया।
गोखले ने कहा कि यदि योजना इस्कॉन को सौंपी जाती, तो स्कूली बच्चों के भोजन से अंडे हटाए जा सकते थे, जिससे उनके पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने बच्चों के पोषण के अधिकार की रक्षा के लिए इस प्रस्ताव का लगातार विरोध किया।
तृणमूल की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी दावा किया कि आरटीआई के जवाब से स्पष्ट हो गया है कि इस्कॉन को मिड-डे मील योजना सौंपने संबंधी न तो कोई औपचारिक मंजूरी दी गई है, न कोई सरकारी आदेश जारी किया गया है और न ही कोई अधिसूचना जारी की गई है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन से अंडे हटाने को लेकर फैलाई गई राजनीतिक भ्रांतियां अब दूर हो गई हैं। वहीं, राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने कहा, "तृणमूल ने क्या दावा किया है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
मामला अदालत में विचाराधीन है। अदालत अपना निर्णय देगी। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। इतना जरूर कहूंगा कि राज्य सरकार छात्रों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है।" इस बीच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।