बजट 2026–27 से भारत के पावर, पानी और निर्यात सेक्टर को नई उड़ान : स्किपर लिमिटेड

केंद्रीय बजट 2026–27
बजट 2026–27 से भारत के पावर, पानी और निर्यात सेक्टर को नई उड़ान : स्किपर लिमिटेड
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : केंद्रीय बजट 2026–27 ऐसे समय में पेश किया जा रहा है, जब भारत तेज़ी से इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित और निर्यात-उन्मुख विकास की ओर अग्रसर है। ऊर्जा, जल और निर्यात जैसे अहम क्षेत्रों में नीतिगत स्पष्टता, संरचनात्मक सुधार और लक्षित प्रोत्साहन न केवल आर्थिक मजबूती को बढ़ावा देंगे, बल्कि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता भी रखते हैं। इस पृष्ठभूमि में, स्किपर लिमिटेड के निदेशकों ने बजट से अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं, जो देश के पावर, वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट इकोसिस्टम के भविष्य को दिशा देने वाली हैं।

शरण बंसल, डायरेक्टर, स्किपर लिमिटेड का बयान

“केंद्रीय बजट 2026 भारत के बिजली अवसंरचना क्षेत्र में एक बड़े परिवर्तन को गति देने वाला सिद्ध हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश आर्थिक विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। स्किपर लिमिटेड जैसी कंपनियों के लिए, जो देश की ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने में अग्रणी हैं, हमारा मानना है कि यह बजट केवल पिछले कुछ वर्षों की गति को बनाए रखने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे ठोस सुधारों और वित्तीय प्रोत्साहनों को भी मजबूती देनी चाहिए जो पूरे पावर वैल्यू चेन में सतत विकास को सक्षम बना सकें।

बिजली वितरण क्षेत्र में सुधारों पर विशेष ध्यान—जैसे प्रदर्शन आधारित ढांचे और स्मार्ट मीटरिंग प्रणालियों के व्यापक कार्यान्वयन—अत्यंत आवश्यक हैं। ये पहल न केवल बिलिंग में पारदर्शिता और परिचालन दक्षता को बढ़ाती हैं, बल्कि दीर्घकाल में डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित करती हैं, जो एक सशक्त और गतिशील ऊर्जा क्षेत्र के लिए अनिवार्य है।

इसके अतिरिक्त, पावर सेक्टर एक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा के केंद्र में हैं। यह बजट नवीकरणीय क्षमता विस्तार, ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को सशक्त करने के लिए अतिरिक्त समर्थन प्रदान करे, जिससे बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा के बीच ग्रिड की विश्वसनीयता बनी रहे। साथ ही, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप आवश्यक पावर उपकरणों के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करने हेतु नीति स्तर पर स्पष्टता भी आवश्यक है।

स्किपर में, हम उन्नत टीएंडडी प्रणालियों, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर समाधानों और ग्रिड-सक्षम तकनीकों में निवेश कर इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें उम्मीद है कि आगामी बजट ऐसे वित्तीय और नीतिगत प्रोत्साहनों को और सशक्त करेगा, जिससे भारत का पावर सेक्टर अधिक दक्ष, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बन सके। यह न केवल राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर उत्कृष्टता का नेतृत्वकर्ता भी बनाएगा।”

 देवेश बंसल, डायरेक्टर, स्किपर लिमिटेड
देवेश बंसल, डायरेक्टर, स्किपर लिमिटेड

केंद्रीय बजट 2026–27

देवेश बंसल, डायरेक्टर, स्किपर लिमिटेड

“जब भारत केंद्रीय बजट 2026–27 के माध्यम से अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं को निर्धारित कर रहा है, तब वैश्विक व्यापार परिदृश्य में हो रहे बदलावों के बीच देश की निर्यात क्षमता को और मजबूत करने का एक बड़ा अवसर मौजूद है। हालांकि भारत ने निर्यात प्रदर्शन में लचीलापन दिखाया है, लेकिन प्रमुख बाजारों में लगातार बढ़ती टैरिफ बाधाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और बाजार पहुंच को बेहतर बनाने के लिए संतुलित और दूरदर्शी नीतिगत समर्थन आवश्यक है।

मेरा मानना है कि एक दूरदृष्टि वाला बजट निर्यात शुल्क के युक्तिकरण, निर्यात-उन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाले उपायों और भारतीय विनिर्माण क्षमताओं को वैश्विक वैल्यू चेन में सहज रूप से एकीकृत करने पर केंद्रित होना चाहिए। समयबद्ध और प्रभावी कस्टम प्रक्रियाएं, निर्यात के लिए बेहतर क्रेडिट सुविधाएं और RoDTEP जैसी योजनाओं के दायरे का विस्तार भारतीय निर्यातकों की लागत प्रतिस्पर्धा को वास्तविक रूप से बढ़ा सकता है।

सरकार द्वारा बड़े वित्तीय समर्थन के साथ एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन की शुरुआत किया जाना एक सकारात्मक कदम है, जो विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों को समर्थन देने की मजबूत मंशा को दर्शाता है, जो अक्सर टैरिफ दबाव और कार्यशील पूंजी की चुनौतियों से प्रभावित होते हैं। भारत-ईयू व्यापार समझौते जैसे एफटीए के तहत तरजीही बाजार पहुंच को वास्तविक निर्यात वृद्धि में बदलना नए अवसरों और बाजार विस्तार के द्वार खोल सकता है।

इस संदर्भ में, बजट को निर्यात तैयारी, तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता आश्वासन में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहनों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बन सकें। निर्यात-आधारित विकास रणनीति न केवल व्यापार को गति देगी, बल्कि रोजगार सृजन, स्थानीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती और सतत एवं समावेशी विकास को भी सुनिश्चित करेगी। स्किपर में, हम इस दृष्टि को साकार करने और नीतिगत दिशा को ठोस निर्यात परिणामों में बदलने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सिद्धार्थ बंसल, डायरेक्टर, स्किपर लिमिटेड
सिद्धार्थ बंसल, डायरेक्टर, स्किपर लिमिटेड

केंद्रीय बजट 2026–27

सिद्धार्थ बंसल, डायरेक्टर, स्किपर लिमिटेड

“भारत के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच जल अवसंरचना क्षेत्र एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जल एक अमूल्य संसाधन है, जो आजीविका, स्वास्थ्य, कृषि और औद्योगिक विकास की नींव है। ऐसे में मजबूत, टिकाऊ और भविष्य के अनुरूप जल प्रणालियां अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी हैं। स्किपर लिमिटेड में हम शहरी और ग्रामीण भारत दोनों के लिए उच्च गुणवत्ता, विश्वसनीय और सतत जल अवसंरचना समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मेरे विचार से, यह बजट सरकार के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा के दृष्टिकोण को मजबूत करने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। पाइप्ड जल नेटवर्क, जल शोधन एवं पुनर्चक्रण संयंत्र, और डिजिटल तकनीकों पर आधारित स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणालियों में निवेश का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। जल जीवन मिशन जैसी प्रमुख योजनाओं को सेवा गुणवत्ता, सामुदायिक सहभागिता तथा संचालन एवं रखरखाव पर अधिक ध्यान देते हुए आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि करोड़ों परिवारों तक सुरक्षित पेयजल की समान पहुंच सुनिश्चित हो सके।

साथ ही, हम उम्मीद करते हैं कि बजट में नवीन वित्तपोषण मॉडल, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और प्रदर्शन आधारित अनुदानों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे विशेषकर अंतिम छोर (लास्ट-माइल) वितरण में निहित संभावनाओं को साकार किया जा सके। जल अवसंरचना को जलवायु-संवेदनशील बनाना भी अत्यंत आवश्यक है। भंडारण, उपचार और पुनः उपयोग क्षमताओं में निवेश तथा नीतिगत स्पष्टता निजी क्षेत्र की भागीदारी और तकनीक के व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित करेगी। एक प्रगतिशील बजट जो जल अवसंरचना को प्राथमिकता देता है, न केवल भारत की विकास गति को तेज करेगा, बल्कि इस जीवनदायी संसाधन के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित कर देश की समग्र खुशहाली और कल्याण को भी सुदृढ़ करेगा।”

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