मन का वास्तविक भोजन है भगवत भजन : स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज

गंगासागर धाम भवन निर्माण के लिए सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ
Kolkata
स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज
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कोलकाता : राष्ट्रीय संत स्वामी श्री गोविंददेव गिरिजी महाराज ने कहा कि मिठाइयों और स्वादिष्ट व्यंजनों से जीभ तथा पेट की तृप्ति तो हो सकती है, लेकिन मन को वास्तविक शांति भगवत भजन से ही मिलती है। सच्चे मन से किया गया भजन व्यक्ति को आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है और भगवान से जुड़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।

वे सोमवार को वीआईपी रोड के गोलाघाटा स्थित डीवीनीटी पैवेलियन में श्री दाधीच परिषद (कोलकाता) की ओर से गंगासागर धाम भवन निर्माण प्रकल्प के लिए आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

कथा के शुभारंभ से पहले लेकटाउन स्थित बाल हनुमान मंदिर से महिला समिति के नेतृत्व में 151 महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। विभिन्न मार्गों से होते हुए यात्रा डीवीनीटी पैवेलियन पहुंची। इसके बाद लगभग 200 महिलाओं ने दधिमती माताजी का सामूहिक मंगल पाठ किया।

व्यासपीठ से स्वामीजी ने भागवत महात्म्य, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और धुंधकारी की मुक्ति जैसे प्रसंगों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मनुष्य में संस्कार, सकारात्मकता और भगवान के प्रति प्रेम बढ़ाता है।

राजा परीक्षित का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भागवत कथा जीवन और मृत्यु से जुड़े भय से उबरने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि परमात्मा में विश्वास रखने वाला व्यक्ति चिंता के बजाय चिंतन को महत्व देता है।

महाराजश्री ने भगवान श्रीकृष्ण और उद्धव के प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीमद्भागवत को धरती पर भगवान की उपस्थिति का प्रतीक बताया। उन्होंने अपने भारत भ्रमण के अनुभव भी साझा किए।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान वैद्य लक्ष्मण प्रसाद व्यास, महाबीर प्रसाद भाभड़ा, अरुण लड्ढा, बृजमोहन बेरीवाल, बनवारी लाल सोती, राधेश्याम शर्मा और सुशील ओझा उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता में सुरेश ईनाणिया, श्रीगोपाल व्यास, पंकज शर्मा, संदीप शर्मा, अनुराग शर्मा, नवीन जोशी, रेणु मिश्रा, नीता असोपा, अंजू दाधीच सहित अन्य सहयोगियों की सक्रिय भूमिका रही।

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