

कोलकाता : छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की आस्था, परंपरा और सामाजिक संघर्ष पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिला है। 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक भारतबाला गणपथी को रजत कमल प्रदान किया।
इस राष्ट्रीय सम्मान का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि रामनामी समाज इस वर्ष मानिकतल्ला चलताबागान लोहापट्टी दुर्गापूजा की 84वीं वर्ष की थीम ‘निशान—द मार्क’ का केंद्र है। कलाकार अदिति चक्रवर्ती की परिकल्पना पर आधारित यह थीम रामनामी समाज की विशिष्ट परंपरा, आस्था और शांतिपूर्ण प्रतिरोध की कहानी को सामने ला रही है।
रामनामी समाज की परंपरा 19वीं सदी के अंतिम दशक से जुड़ी है। समुदाय के सदस्य शरीर पर रामनाम अंकित कर इसे भक्ति, पहचान और आस्था के प्रतीक के रूप में धारण करते हैं। डॉक्यूमेंट्री इसी अनूठी परंपरा और उसके सामाजिक संदर्भ को रेखांकित करती है।
चलताबागान दुर्गापूजा समिति के चेयरमैन संदीप भूतोड़िया ने कहा कि ‘निशान’ के जरिए इस विशिष्ट भारतीय परंपरा को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। 31 अगस्त को थीम के शुभारंभ के दौरान रामनामी समाज के बुजुर्गों ने रामचरितमानस पाठ और भजन भी प्रस्तुत किए थे।
थीम को और विशेष बनाने के लिए ग्रैमी पुरस्कार विजेता एवं पद्म भूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट की संगीत रचना भी शामिल की गई है। ‘दुर्गापूजा कनेक्ट’ ऐप के जरिए थीम को देश-विदेश के दर्शकों तक पहुंचाने की योजना है।