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कोलकाता : कलकत्ता विश्वविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर नया चेयर प्रोफेसर पद शुरू करने की चर्चाओं के बीच यह तथ्य सामने आया है कि उनके नाम का चेयर प्रोफेसर पद पहले से ही विश्वविद्यालय में मौजूद है। हालांकि, वर्ष 1986 के बाद से इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है और यह लगभग चार दशकों से रिक्त पड़ा है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन इसकी वर्तमान स्थिति, सरकारी स्वीकृति और वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा में जुट गया है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने प्रेसिडेंसी कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक करने के बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से बंगला भाषा एवं साहित्य में स्नातकोत्तर किया था। वर्ष 1934 में मात्र 33 वर्ष की आयु में वे विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने थे। उनके कार्यकाल को विश्वविद्यालय के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, समाजशास्त्र विभाग में वर्ष 1975 में स्थापित इस चेयर प्रोफेसर पद की वैधता, वित्तीय स्रोत और प्रशासनिक स्थिति की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि पद की मान्यता अब भी प्रभावी है, तो इस पर दोबारा नियुक्ति की जाएगी। अन्यथा, नए सिरे से इसी नाम का चेयर प्रोफेसर पद सृजित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
रजिस्ट्रार देवाशीष दास ने बताया कि संबंधित सभी दस्तावेजों की तलाश और जांच की जा रही है, ताकि पद की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो सके। वहीं, कुलपति आशुतोष घोष ने कहा कि पूरा मामला अभी विचाराधीन है और सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।