

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : भारत चेम्बर आॅफ काॅमर्स के पूर्व अध्यक्ष सीताराम शर्मा ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के नौवें बजट को दिशाहीन एवं निराशाजनक बताते हुए कहा कि इस तथाकथित युवा-शक्ति बजट में युवाओं की आज की सबसे बड़ी समस्याओं - बेरोजगारी, बढ़ती महँगाई एवं आर्थिक विषमता के विषयों - पर कहीं कोई नीति-निर्देश एवं कार्यक्रम प्रस्तुत नहीं किया गया। बजट ने बाजार और आम आदमी दोनों को निराश किया है। सेंसेक्स 1000 अंक और निफ्टी 500 अंक से लुढ़का है।
मैं आर्थिक आँकड़ों - जीडीपी, पूँजीगत व्यय, बजटीय प्रावधान आदि के बजाये समाज के विभिन्न वर्गों - गरीब, मध्यम वर्ग, नौकरी-पेशा - की अपेक्षाओं की कसौटी पर बजट की विवेचना करना चाहता हूँ। बढ़ती मुद्रास्फीति, महँगाई और घर-खर्चों में तेजी से वृद्धि के संदर्भ में मध्यम वर्ग की बजट से अपेक्षा थी कि जीवन के खर्च में कुछ कमी आयेगी, आयकर में कटौती होगी, आम आदमी की जरूरतों के सामान की कीमतों में कमी के लिये बजट कुछ कदम उठायेगा; आयकर मुक्त आय में बढ़ोत्तरी होगी; शिक्षा, स्वास्थ्य एवं घर के खर्च में कमी आयेगी, लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट को ऐतिहासिक बताते हुए इसे अपार अवसरों का राजमार्ग बताया। श्री शर्मा ने विदेशी मुद्रा अधिनियम में प्रस्तावित सुधारों का, एवं इन्कम टैक्स के नियम एवं फाॅर्म में सरलीकरण का, तथा टैक्स रिटर्न भरने की सीमा बढ़ाने का स्वागत किया। हालाँकि उन्होंने विदेशों में छिपाये संपत्ति रखने पर नहीं होगी जेल, के ऐलान को पिछले दरवाजे से इनको सुरक्षित रखने का प्रयास बताया।