न्यूरो साइंसेज के सफर को शब्द देती पुस्तक ‘टचिंग टुमारो’ का विमोचन

न्यूरो रिहैबिलिटेशन की वैश्विक पहचान की कहानी
टचिंग टुमारो, मिरेकल्स डू हैपन पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उपस्थित डॉ. सुपर्ण गांगुली, मुनमुन सेन, जैन मिश्रीलाल, बाची कारकरिया, एम. के. सिंह, मेजर जनरल प्रो. अनुपम चट्टोपाध्याय (डीजीए)
टचिंग टुमारो, मिरेकल्स डू हैपन पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उपस्थित डॉ. सुपर्ण गांगुली, मुनमुन सेन, जैन मिश्रीलाल, बाची कारकरिया, एम. के. सिंह, मेजर जनरल प्रो. अनुपम चट्टोपाध्याय (डीजीए)
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कोलकाता : मानव इच्छाशक्ति, विज्ञान और करुणा के संगम से जन्मी प्रेरक पुस्तक टचिंग टुमारो, मिरेकल्स डू हैपन का विमोचन गुरुवार को प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। यह पुस्तक न्यूरोरि हैबिलिटेशन के क्षेत्र में एक असाधारण यात्रा को शब्द देती है। एक ऐसी यात्रा, जो यह सिद्ध करती है कि जब इंसान परिस्थितियों के आगे झुकने से इंकार करता है, तब चमत्कार संभव होते हैं। इस पुस्तक के संयुक्त लेखक हैं इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंसेज़, कोलकाता में न्यूरो रिहैबिलिटेशन विभाग के प्रमुख और कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपी के निदेशक डॉ सुपर्ण गांगुली। वैश्विक विचारक डॉ लाल भाटिया ने अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा किए। डॉ. सुपर्ण गांगुली ने पुस्तक की परिकल्पना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कहानी उस न्यूरो रिहैबिलिटेशन टीम से शुरू होती है, जिसने केवल छह समर्पित विशेषज्ञों के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी और आज 75 विशेषज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित टीम बन चुकी है। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक केवल एक संस्थान के विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प, धैर्य और अटूट समर्पण की जीवंत गाथा है, जहां हर मरीज की प्रगति आशा का प्रमाण बन जाती है।

पुस्तक में खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के उस जीवंत परिवेश का भी उल्लेख है, जिसने मरीजों और चिकित्सकीय पेशेवरों, दोनों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को संबल दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पुस्तक देखभाल में मानवता का उत्सव मनाती है, जहां सम्मान, सहानुभूति और करुणा अस्पताल की दीवारों से आगे तक फैलती है। इसमें दर्ज रोगियों की सफलता की कहानियां किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि सशक्त नेतृत्व, टीमवर्क और निरंतर प्रयास का परिणाम हैं। पुस्तक का मूल संदेश और प्रभावशाली टैगलाइन इस सच्चाई को रेखांकित करती है कि चमत्कार संयोग से नहीं, बल्कि अथक परिश्रम, शांत बलिदान, अनगिनत जागी रातों और अडिग टीम भावना से जन्म लेते हैं। आग में तपकर जैसे सोना निखरता है, वैसे ही कठिनाइयों से गुजरकर मानव सामर्थ्य नई शक्ल लेती है। पुस्तक विमेन समारोह में मुनमुन सेन, मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बनीं। अन्य विशिष्ट उपस्थितियों में जैन मिश्रीलाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका बाची कारकरिया, आईपीएस (सेवानिवृत्त) एम. के. सिंह, मेजर जनरल प्रो. अनुपम चट्टोपाध्याय (डीजीए) और उद्यमी धीमान दास उपस्थित थे।

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