

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के दावे के बाद प्रदेश भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के कक्ष में हुई एक हाई-प्रोफाइल 'क्लोज डोर' मीटिंग ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, लगभग 50 मिनट तक चली इस बैठक में भाजपा के करीब 60 विधायक मौजूद रहे। बैठक की कमान विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त सह-प्रभारी तथा त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने संभाली। इस दौरान विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में तत्काल ‘जनसंपर्क अभियान’ शुरू करने और चौबीसों घंटे जनता के बीच सक्रिय रहने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। बैठक में बिप्लब देब ने विधायकों से राज्य की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का फीडबैक लिया और कहा कि उन्हें बंगाल की जिम्मेदारी एक निर्णायक मोड़ पर सौंपी गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि विधायकों के समर्पण और सक्रिय भागीदारी से जनता का आक्रोश ईवीएम के माध्यम से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विधायकों को मुख्य रूप से भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस द्वारा कथित अराजकता फैलाने जैसे विषयों को जनता के बीच प्रमुखता से उठाने को कहा गया। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को डराने-धमकाने के आरोपों पर भी लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। बैठक के बाद भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि राज्य की मौजूदा स्थिति और जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के प्रति जनसमर्थन में तेज गिरावट देखी जा रही है और भाजपा चुनाव के बाद भारी बहुमत के साथ विधानसभा में प्रवेश करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टिकट वितरण पर कोई चर्चा नहीं हुई और पार्टी हाईकमान की रणनीति के अनुसार सभी को मिलकर काम करना होगा, चाहे उम्मीदवार मौजूदा हों या नए।