

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), खड़गपुर की बैठक तथा हिंदी, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित विशेष संगोष्ठी का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर में किया गया। कार्यक्रम में नराकास खड़गपुर से संबद्ध विभिन्न सदस्य कार्यालयों के कार्यालयाध्यक्षों, राजभाषा अधिकारियों एवं कार्मिकों तथा अन्य सहयोगियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में नराकास की 37वीं छमाही बैठक का आयोजन किया गया। राजभाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. अशोक मिश्र ने नराकास के अध्यक्ष एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के सम्मान में स्वागत वक्तव्य दिया तथा श्री वेद प्रकाश मिश्र, श्रीमती सुकन्या शर्मा आदि सहयोगियों ने पुष्पगुच्छ से अतिथियों का स्वागत किया। प्रो. अशोक मिश्र ने नराकास की मुख्य गतिविधियों एवं विशेष उपलब्धियों के विषय में अवगत कराया।
बैठक में डॉ. विचित्रसेन गुप्त, उपनिदेशक (कार्यान्वयन), पूर्व क्षेत्र, ने छमाही प्रगति रिपोर्टों की समीक्षा की एवं राजभाषा कार्यान्वयन से संबंधित मुख्य बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी में काम बहुत आसान है और सबके लिए आसान है। बस अपनी मानसिकता बदलते हुए सकारात्मक भाव से तकनीक की विवेकपूर्ण सहायता लेते हुए काम करते चलना है।
नराकास खड़गपुर के अध्यक्ष ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया और अपेक्षा व्यक्त की कि एआई के युग में अब भाषाओं के प्रयोग में कोई बाधा नहीं रह गई है। हम सब अपनी मातृभाषाओं एवं उनकी लिपियों को संरक्षित कर सकते हैं और उनके विकास में योगदान दे सकते हैं। अपनी भाषाओं में ज्ञान-सृजन, शोध एवं ज्ञान के प्रसार से देश विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनेगा।
श्री प्रभात कुमार गुप्ता, सहायक निदेशक (भाषा), ने खड़गपुर में प्रशिक्षण की स्थिति की विस्तृत जानकारी दी और कहा कि अधिकाधिक कार्मिकों को प्रशिक्षण के लिए नामित किया जाए।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में प्रसिद्ध हिंदी तकनीक विशेषज्ञ, यंत्रबुद्धि सहित 10 पुस्तकों के लोकप्रिय लेखक एवं सम्मोहक वक्ता तथा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच की विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। श्री दाधीच हिंदी, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुवाद, लेखन, संपादन तथा डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं और हिंदी तकनीक के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
श्री बालेन्दु जी ने आधुनिक युग को भारतीय भाषाओं एवं राजभाषा हिंदी के लिए बहुत अनुकूल बताया और कहा कि मात्र नारों के बल पर हिंदी या भारतीय भाषाएँ आगे नहीं बढ़ेंगी, बल्कि अधिकाधिक प्रयोग से आगे बढ़ेंगी। एआई का प्रयोग बहुत सोच-समझकर करना होगा, जिससे कि यह हमारे निर्णय पर हावी न हो जाए और इससे प्राप्त सूचनाओं को हमें सदैव मानवीय विवेक से समीक्षित करना होगा।
आपने एआई की शक्ति एवं विश्लेषण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कहा कि अब एआई संदर्भों को समझती है और काफी सटीक निष्कर्ष देने में सक्षम है। आवश्यकता है कि आप एक-दो मॉडल चुनें और उन पर गंभीरता से काम करें। अनेक मॉडलों पर अपनी जानकारियाँ साझा न करें और साथ ही कार्यालयीन गोपनीयता का भी विशेष ध्यान रखें।
श्री बालेन्दु जी ने प्रश्नों के उत्तर में कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव, हिंदी भाषा के लिए उपलब्ध नई तकनीकी संभावनाओं तथा कार्यालयीन कार्यों में आधुनिक डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग से राजभाषा कार्यान्वयन के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। संगोष्ठी में प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि भाषा, प्रशासन, अनुवाद, लेखन और ज्ञान-विनिमय के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन लाने वाली क्रांतिकारी शक्ति है।
श्री वेद प्रकाश मिश्र, श्री बाबलु बर्मन, एडीआरएम, श्री प्रतीक दामा, श्री एम. वी. रजनीकांत, वरिष्ठ महाप्रबंधक, श्री अभिषेक त्रिपाठी, श्री अंचल सक्सेना, श्री चंदन कुमार, श्री पटनायक, श्री अनूप तिवारी आदि ने भी अपने विचार साझा किए। खड़गपुर सहित कोलकाता, बरहमपुर, आसनसोल, धनबाद, दीघा, सालबोनी, जाजपुर-केन्दुझर आदि अनेक शहरों से अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे तथा लगभग 300 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सहभागिता की।
इस अवसर पर नराकास खड़गपुर के सदस्य-सचिव डॉ. राजीव कुमार रावत, वरिष्ठ हिंदी अधिकारी ने कहा कि हिंदी के कार्यक्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा राजभाषा कार्मिकों के कौशल-विकास में अभिवृद्धि की दृष्टि से यह अनुकूल समय है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि राजभाषा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को केवल परंपरागत कार्य-पद्धतियों तक सीमित न रहकर नई तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा हिंदी कंप्यूटिंग के उपकरणों में दक्षता प्राप्त करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नराकास एवं राकास की बैठकों को मात्र औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता के साथ समीक्षा, नीति-निर्माण एवं कार्ययोजना-निर्माण की दृष्टि से आयोजित किया जाना चाहिए।
नराकास खड़गपुर की बैठक में समिति की गतिविधियों, राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति, शील्ड, शैक्षणिक भ्रमण तथा आगामी कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर समिति से जुड़े सदस्य कार्यालयों के बीच अधिक सक्रिय समन्वय, राजभाषा कार्यों में गुणवत्ता-वृद्धि तथा प्रशिक्षण गतिविधियों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया गया कि वे राजभाषा के कार्य को केवल भाषा संबंधी दायित्व न मानकर अपने व्यावसायिक कौशल के विकास का भी माध्यम बनाएं और आधुनिक तकनीक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में हिंदी को सक्षम, समृद्ध और उपयोगी भाषा के रूप में आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
श्रीमती सुकन्या शर्मा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।