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कोलकाता सिटी
स्वास्थ्य आयोग के कामकाज का होगा पूर्ण डिजिटलीकरण
शिकायतों और पूरी प्रक्रिया को कागजी फाइलों के बजाय ऑनलाइन व डिजिटल व्यवस्था पर स्थानांतरित किया जा रहा
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता :
स्वास्थ्य आयोग (पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमीशन) की कार्यप्रणाली को अब पूरी तरह से डिजिटल रूप देने की तैयारी की जा रही है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) विश्वजीत बसु ने बताया कि आयोग के पास आने वाली शिकायतों और पूरी प्रक्रिया को कागजी फाइलों के बजाय ऑनलाइन व डिजिटल व्यवस्था पर स्थानांतरित किया जा रहा है। विश्वजीत बसु ने बताया कि डिजिटलीकरण का उद्देश्य किसी प्रकार की अनियमितता रोकना नहीं, बल्कि प्रक्रिया को त्वरित और समय के अनुकूल बनाना है। उन्होंने कहा, \"दूरदराज के क्षेत्रों से भी मरीज या उनके परिजन बिना किसी झंझट के ऑनलाइन शिकायत और दस्तावेज दर्ज करा सकेंगे। इससे आयोग के सदस्यों के लिए भी मामलों की समीक्षा करना और उनका तेजी से निपटारा करना कहीं अधिक सुलभ हो जाएगा। \" उन्होंने कहा कि इस बदलाव में थोड़ा समय जरूर लगेगा, लेकिन इसके लागू होने पर कार्यकुशलता में काफी सुधार आएगा। आयोग की बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस दिन सात लंबित मामलों पर सुनवाई और गहन समीक्षा की गई।
दवाइयों और सेवाओं की दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य
अध्यक्ष ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में पारदर्शिता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि चिकित्सा प्रतिष्ठानों को अपने बेड चार्ज, जांच शुल्क, सेवा दरें और दवाइयों के क्रय-विक्रय मूल्य को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि क्लीनिकल प्रतिष्ठान स्वतः इसे लागू नहीं करते हैं, तो नियमों के तहत इसे कड़ाई से लागू कराया जाएगा। इस संबंध में आयोग द्वारा फिजिकल ऑडिट और निरीक्षण भी किए जा रहे हैं।
अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता
स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति पर बात करते हुए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बसु ने कहा कि राज्य में समग्र व्यवस्थाएं पूरी तरह संतोषजनक नहीं हैं और कई कमियां व समझौते देखने को मिले हैं, जिससे मरीजों को उनके अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि आयोग का प्रयास केवल शिकायतों का निवारण करना ही नहीं, बल्कि क्लिनिकल प्रतिष्ठानों को संवेदनशील बनाना भी है ताकि शिकायतों की संख्या में ही कमी लाई जा सके। उन्होंने इस सुधार प्रक्रिया में राज्य सरकार के सक्रिय सहयोग और आयोग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी की भी सराहना की।

