

कोलकाता : मानसून के दौरान बढ़ी नमी, बदलते मौसम और वायु में एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों की अधिकता के बीच शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में आंखों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, इन दिनों वायरल कंजंक्टिवाइटिस और मौसमी एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के मामले एक साथ बढ़ने से अस्पतालों में मरीज ज्यादा देखे जा रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान आंखों में लालिमा, जलन, खुजली, पानी आना, सूजन और देखने में परेशानी जैसी शिकायतों के साथ बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये वायरल संक्रमण तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, जबकि मौसमी एलर्जी धूल, प्रदूषण और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण अधिक देखने को मिल रही है।
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों प्रकार के कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनके उपचार का तरीका अलग होता है। इसलिए आंखों में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। बिना सलाह के स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप का उपयोग करने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को संक्रमित व्यक्ति के तौलिया, रूमाल, तकिए या अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं का उपयोग नहीं करने, बार-बार हाथ धोने, आंखों को अनावश्यक रूप से छूने से बचने और संक्रमण के दौरान भीड़भाड़ वाले स्थानों में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
एलर्जी से पीड़ित लोगों को धूल और प्रदूषण से बचाव के लिए चश्मा पहनने तथा बाहर से लौटने के बाद आंखों को साफ पानी से धोने की भी सलाह दी जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मामलों में समय पर उपचार से मरीज कुछ दिनों में स्वस्थ हो जाते हैं। हालांकि, यदि आंखों में तेज दर्द, धुंधला दिखाई देना, अत्यधिक सूजन या लगातार परेशानी बनी रहे तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए, ताकि संक्रमण गंभीर रूप न ले सके।