

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक एसएलपी दायर की है। इसमें ममता तृणमूल कांग्रेस के महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी को मिले सुरक्षा कवच को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने उन्हें 30 नवंबर तक का सुरक्षा कवच प्रदान कर रखा है। यानी इस तारीख तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है। हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने उन्हें 25 अगस्त को सुरक्षा कवच दिया था। उनके खिलाफ कोलकाता और दक्षिण 24 परगना में दायर किए गए मामलों का हवाला देते हुए सुरक्षा कवच देने के लिए उनकी तरफ से अपील की गई थी। राज्य सरकार की तरफ से दायर एसएलपी में कहा गया है कि सुरक्षा कवच की अवधि समाप्त होने से पहले ही इसे खारिज किया जाए। दिवाली के अवकाश के बाद इस मामले की सुनवाई की जाने की संभावना है। हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान ही राज्य सरकार की तरफ से स्टे देने की अपील की गई थी। राज्य सरकार की तरफ से दलील दी गई की थी कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर के साथ ही दक्षिण 24 परगना के कालीतला और विष्णुपुर थाने में मामले दायर किए गए हैं। अभिषेक बनर्जी ने अग्रिम जमानत के लिए भी कोई याचिका दायर नहीं की है। एक सिंगल पिटीशन दायर करके इतनी सारी एफआईआर को चुनौती नहीं दी जा सकती है। अभिषेक बनर्जी की तरफ से दायर मामले में कहा गया था कि सत्ता परिवर्तन के बाद उनके खिलाफ 16 एफआईआर दर्ज की गई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील को खारिज करते हुए सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया था। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा था कि कालीतला और विष्णुपुर में जो एफआईआर दर्ज की गई है वह 2017 और 2020 का मामला है। इनमें अभिषेक बनर्जी की सीधी भागीदारी का कोई प्रमाण नहीं है। इसके अलावा यह सारे मामले सत्ता परिवर्तन के बाद दायर किए गए हैं। हाई कोर्ट ने किसी भी एफआईआर को खारिज नहीं किया है। कहा है की जांच जारी रहेगी और अभिषेक बनर्जी को अगर तलब किया जाता है तो इसके लिए 48 घंटे की नोटिस देनी पड़ेगी। इसे इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी को आदेश दिया है कि उन्हें जांच में सहयोग करना पड़ेगा।