SIR विवाद सुलझाएंगे न्यायिक अधिकारी

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के बेंच का आदेश
SIR विवाद सुलझाएंगे न्यायिक अधिकारी
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जितेंद्र : सन्मार्ग संवाददाता

नयी दिल्ली/कोलकाता : पश्चिम बंगाल के SIR विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी न्यायिक अधिकारियों को सौंपी गई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली के बेंच ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवायी के बाद यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजय पाल को एक विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत उन्हें शनिवार को ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर एक बैठक बुलानी पड़ेगी। इस बैठक में एडिशनल सालिसिटर जनरल, एडवोकेट जनरल, राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और मुख्य चुनाव अधिकारी हिस्सा लेंगे। बैठक कहां होगी यह अभी तय नहीं हो पायी है।

डिसक्रिपिसेंसी के मुद्दे को जिलास्तर पर हल करने के लिए जिला जज, अतिरिक्त जिला जज और सेवानिवृत्त जजों की एक कमेटी बनायी जाएगी। यह कमेटी लॉजिकल डिसक्रिपिसेंसी के मुद्दे को सुलझाने के लिए किए जा रहे कार्य की मॉनिटरिंग करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस को इन जजों को नियुक्त करने का आदेश दिया है। डिसक्रिपिसेंसी की स्क्रूटनी को लेकर जो मामले बाकी रह गए हैं उसकी सुनवायी के बाद ये आदेश देंगे। इसके साथ ही इस कमेटी को सलाह देने के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जजों को नियुक्त करना पड़ेगा। चीफ जस्टिस इस काम को अंजाम देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इनके आदेश को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के समतुल्य मानना पड़ेगा। राज्य सरकार को इसका अनुपालन करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने जिलों के डीएम और एसपी को आदेश दिया है कि जिला जजों को इस काम के लिए लॉजिस्टिकल सुविधाएं उपलब्ध करानी पड़ेगी। डिसक्रिपिसेंसी से जुड़े 95 फीसदी मामले हल हो गए है और सिर्फ पांच फीसदी मामले ही बाकी रह गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 28 फरवरी को मतदाता सूची का प्रकाशन करना पड़ेगा। इसके बाद अवुपूरक मतदाता सूची का प्रकाशन किया जा सकता है। इस पर एडवोकेट कपिल सिब्बल की दलील थी कि इससे कानून और व्यवस्था का सवाल खड़ा हो सकता है। निर्वाचन आयोग का जवाब था कि नामांकन के आगे तक मतदाता सूची में नाम दर्ज किए जाने का प्रावधान है। बेंच ने डीजीपी को नये सिरे से एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया है। उनके एफिडेविट से बेंच संतुष्ट नहीं हो पाया। डीजीपी को इस नये एफिडेविट में बताना पड़ेगा कि अभी तक कितना शिकायतें आई हैं और कितने का निस्तारण किया गया है।

तो फिर इतना हंगामा क्यों

मामले की सुनवायी के दौरान कहा गया कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में सिर्फ 7.5 फीसदी नाम ही काटे गए हैं। इससे इतर आंकडों का हवाला देते हुए बताया गया कि गुजरात , केरल व तमिलनाडू आदि राज्यों में काफी नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। ये वे लोग हैं जिनकी मौत हो चुकी है या फिर कहीं अन्यत्र जाकर बस गए हैं। इसके जवाब में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल किया कि तो फिर इतना शोर-शराबा क्यो मचा हुआ है।




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