शुभेंदु नहीं होते तो नंदीग्राम आंदोलन सफल नहीं होता : सुखेंदु शेखर रॉय

खुले दिल से की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ
सुखेंदु शेखर रॉय
सुखेंदु शेखर रॉय
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी पर तीखा हमला बोला है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल की करारी हार के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की खुलकर प्रशंसा की।

गुरुवार को दिए एक इंटरव्यू में सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा, “शुभेंदु अधिकारी और उनके पूरे परिवार से मेरे पुराने संबंध हैं। बंगाल की जनता शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार के कामकाज से खुश है। सरकार सही रास्ते पर चल रही है और इसी तरह चलनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि नंदीग्राम आंदोलन की सफलता में शुभेंदु अधिकारी की भूमिका सबसे अहम थी। रॉय ने कहा, “शुभेंदु अधिकारी नहीं होते तो नंदीग्राम आंदोलन सफल नहीं होता। जब तृणमूल के कार्यकर्ता सीपीएम के अत्याचार के कारण घर छोड़ने को मजबूर थे, तब शुभेंदु ने उन्हें शरण दी थी।”

सुखेंदु शेखर रॉय ने शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनके साथ उनका चार दशक पुराना रिश्ता है। उन्होंने शुभेंदु को “बेहद मेहनती और अनुभवी नेता” बताते हुए कहा कि कम उम्र में ही उन्होंने सांसद, विधायक और मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली।

इधर, पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “किसी भी दल में दो पावर सेंटर नहीं होने चाहिए। कांग्रेस में ऐसा हुआ था और पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।” राजनीतिक हलकों में इसे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच शक्ति संघर्ष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

इससे पहले भी सुखेंदु शेखर रॉय सोशल मीडिया पर “पश्चिम बंगाल की जनता ने असहनीय अराजकता का अंत कर दिया” लिखकर पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष हमला बोल चुके हैं। उनके ताजा बयान ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और असंतोष की चर्चा को और तेज कर दिया है।

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