चीनी महंगी, इथेनॉल नीति पर विपक्ष ने केंद्र को घेरा

त्योहारी सीजन से पहले इथेनॉल पर सियासत
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कोलकाता : त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमत ने घरेलू बजट के साथ-साथ राजनीतिक बहस को भी गरमा दिया है। बाजार में कीमतों में उछाल के बीच विपक्षी दल इसके लिए केंद्र की इथेनॉल नीति को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को भी कीमत बढ़ने की वजह बताया। घोष ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के कारण चीनी बाजार प्रभावित हो रहा है।

आईएसएफ प्रमुख नौशाद सिद्दीकी ने भी केंद्र की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इथेनॉल उत्पादन का असर चीनी के उत्पादन पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे एक ओर वाहनों के पुर्जों पर असर पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर चीनी महंगी हो रही है।

ऋतब्रत बनर्जी समर्थक विधायक मदन मित्रा ने कहा कि सरकार मध्यमवर्ग के जेब पर ‘रोडरोलर’ चला रही है। उनके मुताबिक चीनी की बढ़ती कीमत केंद्र की विफलता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि चीनी की मौजूदा कीमत वृद्धि का इथेनॉल उत्पादन से कोई संबंध नहीं है और इसे लेकर किए जा रहे दावे निराधार हैं।

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