राज्य विश्वविद्यालयों को केंद्र के साथ समझौते में बड़ी राहत

केंद्रीय संस्थानों के साथ एमओयू के लिए अब राज्य की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राज्य विश्वविद्यालयों को केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा संस्थानों और एजेंसियों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ी राहत मिली है। अब केंद्रीय शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान एजेंसियों और अन्य संगठनों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) या संयुक्त परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं होगा।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में राज्य के 31 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और रजिस्ट्रारों के साथ हुई लंबी वर्चुअल बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अब तक विश्वविद्यालयों को किसी भी केंद्रीय संस्था के साथ साझेदारी करने से पहले विकास भवन के माध्यम से नवान्न से अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे शोध और विकास परियोजनाओं में देरी होती थी।

इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यूजीसी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा अनुदान में कटौती के कारण पहले से ही शोध, आधारभूत ढांचे और विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। नयी व्यवस्था से विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और फंडिंग के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है।

जानकारी के मुताबिक, बैठक में ओबीसी आरक्षण नीति में हुए बदलाव पर भी चर्चा हुई। सरकार ने 18 मई के बाद 2010 से पहले लागू आरक्षण व्यवस्था को फिर से प्रभावी करने का निर्णय लिया है। इसके चलते केंद्रीकृत प्रवेश पोर्टल (CAP) में 460 संस्थानों के सीट मैट्रिक्स में संशोधन किया गया है, ताकि नयी सरकारी नीति के अनुरूप दाखिला प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

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