'राष्ट्रीय मेला' बने गंगासागर, राज्य सरकार ने केंद्र से की बड़ी मांग

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार के लिए वित्तीय व संस्थागत सहयोग भी मांगा
फाइल फोटो
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दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य सरकार ने देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शुमार गंगासागर मेले को 'राष्ट्रीय मेला' घोषित करने के लिए केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। राज्य सरकार ने इसके साथ ही मेले की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और प्रचार-प्रसार के लिए केंद्र से वित्तीय और संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग के सचिव सौमित्र मोहन की तरफ से केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि गंगासागर मेला भारत की आध्यात्मिक आस्था, सांस्कृतिक विविधता और सदियों पुरानी तीर्थ परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इसकी ऐतिहासिक विरासत, विशाल स्वरूप और देशभर से होने वाली भागीदारी इसे राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाने की पात्र बनाती है।

आस्था, संस्कृति और परंपरा का विराट संगम

प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि मकर संक्रांति के अवसर पर हर वर्ष आयोजित होने वाला गंगासागर मेला भारत के सबसे पुराने, सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु, संत-महात्मा और पर्यटक पहुंचते हैं। यह आयोजन भारत की आध्यात्मिक परंपराओं, जीवंत सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन तीर्थयात्रा संस्कृति का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है।

'राष्ट्रीय मेला' का दर्जा मिलने से मिलेगा नया आयाम

राज्य सरकार का मानना है कि यदि केंद्र सरकार गंगासागर मेले को 'राष्ट्रीय मेला' का दर्जा देती है, तो इससे इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही मेले से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं के दीर्घकालिक संरक्षण, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और व्यापक प्रचार-प्रसार को भी बढ़ावा मिलेगा।

केंद्र से वित्तीय एवं संस्थागत सहयोग की मांग

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय से गंगासागर मेले के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए वित्तीय एवं संस्थागत सहयोग का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में मेले के दस्तावेजीकरण और डिजिटल अभिलेखीकरण, लोक एवं पारंपरिक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन, सांस्कृतिक व्याख्या एवं विरासत केंद्रों की स्थापना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनों और प्रदर्शनियों के आयोजन तथा गंगासागर की सांस्कृतिक विरासत से संबंधित प्रकाशनों और प्रचार सामग्री के निर्माण एवं प्रसार के लिए केंद्र से सहायता मांगी है।


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