रामज विवाद पर दो हिस्सों में बंटी प्रदेश कांग्रेस

अधीर रंजन के हस्तक्षेप से अनुशासनात्मक कार्रवाई पर उठे सवाल
अधीर रंजन चौधरी और शुभंकर सरकार (फ़ाइल फ़ोटो)
अधीर रंजन चौधरी और शुभंकर सरकार (फ़ाइल फ़ोटो)
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कोलकाता : कांग्रेस नेता अली इमरान रामज (विक्टर) के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर पश्चिम बंगाल कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य एवं वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा करने का अनुरोध किया है। इससे संकेत मिला है कि रामज प्रकरण पर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय मौजूद है।

अपने पत्र में अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि मामले की सुनवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अनुशासनात्मक जांच पूरी होने से पहले ही प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर रामज के निष्कासन की जानकारी सार्वजनिक क्यों की गई। उनके अनुसार, समिति को इस पहलू की भी जांच करनी चाहिए।

अधीर रंजन ने रामज को व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले संबंधित नेता को सुनवाई का पूरा अधिकार मिलना चाहिए, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस (पीसीसी) ने स्पष्ट किया है कि अधीर रंजन चौधरी द्वारा पत्र भेजने की जानकारी सार्वजनिक की गई है, लेकिन अब तक पार्टी कार्यालय को कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पीसीसी नेताओं ने कहा कि पत्र मिलने के बाद उसमें दिए गए सुझावों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति पार्टी संविधान और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विचार करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधीर रंजन की इस पहल ने रामज प्रकरण को केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, निर्णय प्रक्रिया और संगठनात्मक पारदर्शिता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

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