

कोलकाता : श्री वर्धमान जैन संघ में युगद्रष्टा विजय वल्लभ सुरीश्वर महाराज के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित नाट्य मंचन का शुभारंभ धार्मिक एवं सामाजिक गरिमा के साथ हुआ। मुनि रविन्द्र विजय महाराज और मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन समाजसेवी कमल सिंह रामपुरिया और जितेन्द्र मेहता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
यह नाट्य प्रस्तुति पद्मश्री से सम्मानित आचार्य नित्यानंद सुरीश्वर महाराज द्वारा लिखित कृति ‘युगद्रष्टा विजय वल्लभ महाराज से प्रेरणा’ पर आधारित थी। मोतीचंद दुगड़ ने इसका नाट्य रूपांतरण किया, जबकि विजय दमानी ने निर्देशन की जिम्मेदारी निभाई।
नाटक के माध्यम से विजय वल्लभ सुरीश्वर महाराज के प्रेरक जीवन, उनके विचारों और आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय और प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में अमित कोचर ने नेपथ्य की जिम्मेदारी संभाली। भजन प्रवाहक दिलीप दुगड़ और हेमन्त बांगाणी का भी विशेष योगदान रहा।
विशिष्ट सहयोगी के रूप में आशीष कोचर ने अपनी भूमिका निभाई। आयोजन से जुड़े लोगों और उपस्थित समाजजनों ने कलाकारों के अभिनय तथा पूरी प्रस्तुति की सराहना की।
इस अवसर पर श्री वर्धमान जैन संघ के ट्रस्टी कमल सिंह रामपुरिया, विजय चन्द बैद, रतनचंद बांगाणी, महेन्द्र सुराणा, दिलीप दुगड़, विनीत रामपुरिया और नरेन्द्र बांठिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
चातुर्मास प्रबंध समिति की ओर से संयोजक माणकचन्द सेठिया के साथ शांतिलाल रामपुरिया, मोहनलाल कोचर, पारस सावनसुखा, महेन्द्र रामपुरिया, सुरेश बांगाणी, शिखरचंद बांठिया, सौरभ सुराणा, आनंद बांगाणी, अतुल, निर्मल, नवरतन और विजय कोचर सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस नाट्य मंचन के माध्यम से जैन धर्म की आध्यात्मिक एवं नैतिक परंपराओं को जनमानस तक पहुंचाने और आचार्यों के प्रेरणादायी जीवन से नई पीढ़ी को परिचित कराने का संदेश दिया गया।