

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर के एक निजी अस्पताल में पिछले 10 महीनों से भर्ती एक वृद्धा को डॉक्टरों द्वारा डिस्चार्ज दिए जाने के बावजूद उनका बेटा उन्हें घर ले जाने से इनकार कर रहा है। मामला बालीगंज इलाके के एक अस्पताल का है, जहां यह वृद्धा लंबे समय से इलाजरत हैं। जानकारी के अनुसार, अमित भादुड़ी ने पिछले साल 3 फरवरी को अपनी मां को बालीगंज स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया था। वृद्धा की जांघ की हड्डी टूट गई थी, जिसके कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ थी। इसके साथ ही वे उम्रजनित कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज का इलाज पूरा हो चुका है और उन्हें घर ले जाना संभव है। इसी आधार पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन परिवार ने मरीज को ले जाने से मना कर दिया। अस्पताल अधिकारियों का आरोप है कि वृद्धा को डिस्चार्ज नहीं करवाने से अस्पताल का एक बिस्तर लंबे समय से अवरुद्ध है, जिससे अन्य जरूरतमंद मरीजों को भर्ती करने में परेशानी हो रही है।
दूसरी ओर, अमित भादुड़ी का कहना है कि उनकी मां स्वयं चलने-फिरने में सक्षम नहीं हैं, ऐसे में उन्हें अस्पताल से छुट्टी क्यों दी जा रही है। उनका दावा है कि वे समय पर अस्पताल के पूरा खर्च का भुगतान कर रहे हैं, ऐसे में मरीज को अस्पताल में रखने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। इस मामले और अस्पताल की सेवाओं से जुड़ी कुछ शिकायतों को लेकर अमित ने स्वास्थ्य आयोग का दरवाजा खटखटाया था। स्वास्थ्य आयोग के अध्यक्ष (रिटा जस्टिस) असीम कुमार बनर्जी ने कहा कि परिवार की यह मांग स्वीकार्य नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि संबंधित अस्पताल एक जनहितकारी संस्था है और उसका दायित्व सभी मरीजों को सेवा देना है। जो मरीज घर ले जाने योग्य हैं, उन्हें अस्पताल में डिस्चार्ज कराने से रोका नहीं जा सकता। स्वास्थ्य कमीशन ने निर्देश दिया है कि वृद्धा को आगामी 28 फरवरी तक घर ले जाया जाए। साथ ही अस्पताल सेवाओं से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए आयोग की एक प्रतिनिधि टीम अस्पताल का निरीक्षण करेगी।