अरब सागर में फिनलेस पोरपॉइज पर भारत-दक्षिण कोरिया का अहम अध्ययन

कोझिकोड तट पर मिले नमूने से आनुवंशिक, शारीरिक और पारिस्थितिक अध्ययन को मिली नई दिशा
Kolkata
फिनलेस पोरपॉइज पर अहम अध्ययन
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कोलकाता : भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और दक्षिण कोरिया के पुक्योंग नेशनल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अरब सागर में पाए जाने वाले वाइड-रिड्ज्ड इंडो-पैसिफिक फिनलेस पोरपॉइज़ (Neophocaena phocaenoides) पर महत्वपूर्ण संयुक्त अध्ययन किया है।

यह शोध समुद्री स्तनधारी की आनुवंशिक विविधता, शारीरिक संरचना और संभावित आवास को समझने में उपयोगी माना जा रहा है।

अध्ययन की शुरुआत कोझिकोड (कालीकट) बीच, केरल पर मिले प्राकृतिक रूप से मृत फिनलेस पोरपॉइज़ से हुई। ZSI के वैज्ञानिक डॉ. मनोकरन कमलाकन्नन के नेतृत्व में नमूने को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित कर उसका पूरा कंकाल तैयार किया गया। यह कंकाल अब ZSI वेस्टर्न घाट रीजनल सेंटर में संरक्षित है।

पीयर-रिव्यू जर्नल Ecology and Evolution में प्रकाशित शोध में अरब सागर के नमूने का पूर्ण माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम तैयार किया गया। इसकी तुलना प्रशांत महासागर की आबादी से करने पर आनुवंशिक अंतर सामने आए, जिससे हिंद महासागर में अलग उप-आबादियों की संभावना पर आगे अध्ययन की जरूरत बताई गई है।

मॉडलिंग के अनुसार संभावित आवास का केवल 23.4 प्रतिशत हिस्सा ही समुद्री संरक्षित क्षेत्रों या Important Marine Mammal Areas में आता है। शोधकर्ताओं ने बायकैच, जहाजों की टक्कर, तटीय औद्योगिक गतिविधियों और समुद्री प्रदूषण को प्रमुख खतरे बताया है।

डॉ. शंतानु कुंडू, डॉ. धृति बनर्जी और डॉ. विश्वनाथ डी. हेगड़े ने भी अध्ययन के वैज्ञानिक और संरक्षण संबंधी महत्व को रेखांकित किया।

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