

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को चीफ इलेक्शन ऑफिसर (CEO) के कार्यालय पहुंचकर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने वरिष्ठ IAS अधिकारी मनोज अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी मांगें और शिकायतें सौंपीं। अधिकारी ने दावा किया कि SIR से जुड़ी गाइडलाइंस पहले ही जारी हो चुकी थीं, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया। उन्होंने नदिया जिले की एक ऑडियो क्लिप CEO को सौंपते हुए आरोप लगाया कि दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि के दौरान वहां के ADM ने मतदाता सूची में गैर-कानूनी घुसपैठियों को शामिल करने के लिए दबाव बनाया। भाजपा ने इस ऑडियो की फोरेंसिक जांच और संबंधित ADM व DM पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व बर्धमान में तैनात डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर आयशा रानी और नॉर्थ 24 परगना के DM को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने से पहले या तुरंत बाद बदला जाना चाहिए। अधिकारी के मुताबिक, राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 225 ERO ने चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है और नामांकन से पहले उन्हें बदला जाना आवश्यक है। पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत की एक बैठक में मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए अधिकारी ने कहा कि इस पर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुकांत मजूमदार पहले ही मनोज पंत के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। अधिकारी ने CEO से पूरे मामले की जानकारी CEC को भेजने का आग्रह किया और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी रिटायर्ड अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकता। इस दौरान CEO कार्यालय के बाहर उन्हें विरोध का सामना भी करना पड़ा। अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य में हायर सेकेंडरी परीक्षा के चलते माइक्रोफोन पर रोक और धारा 163 लागू होने के बावजूद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने और माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की अनुमति दी।