

दीपक सन्मार्ग संवाददाता
मनाली : हिमालय की ऊंची चोटियों पर बर्फ और माइनस 30 डिग्री तक तापमान के बीच देश की रणनीतिक कनेक्टिविटी का नया अध्याय लिखा जा रहा है। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के प्रोजेक्ट योजक के तहत शिंकू ला दर्रे पर 4.1 किलोमीटर लंबी सड़क सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण पूरा होने पर यह दुनिया की सबसे ऊंची सड़क सुरंग होगी। यह सुरंग सर्दियों में बर्फबारी के कारण लाहौल-स्पीति और लद्दाख के बीच कट जाने वाले संपर्क को खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगी। वहीं, निम्मू-पदुम-दर्चा (NPD) एक्सिस के पूरा होने से सेना को मनाली से लेह तक एक वैकल्पिक और रणनीतिक ऑल-वेदर मार्ग उपलब्ध होगा। पीआईबी की ओर से आयोजित 10-12 पत्रकारों के दल ने हाल ही में प्रोजेक्ट योजक का दौरा कर हिमालय की विषम परिस्थितियों में चल रहे सड़क और सुरंग निर्माण कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने परियोजना की रणनीतिक उपयोगिता और निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी दी।
NPD रोड: सीमा तक तेज होगी सेना की पहुंच
निम्मू-पदुम-दर्चा मार्ग को देश की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद मनाली-लेह के बीच मौजूदा मार्गों के अलावा एक वैकल्पिक संपर्क उपलब्ध होगा। इससे लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों तक सैनिकों, सैन्य वाहनों, भारी हथियारों और रसद की आवाजाही को अधिक सुगम बनाया जा सकेगा। BRO के जवान अत्यधिक ठंड, भारी बर्फबारी और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भूगोल के बावजूद इस मार्ग के निर्माण और रखरखाव में जुटे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मार्ग को वर्ष भर चालू रखने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। रणनीतिक लिहाज से NPD एक्सिस के तैयार होने से सेना की लॉजिस्टिक क्षमता और सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शिंकू ला सुरंग तोड़ेगी बर्फ की दीवार
शिंकू ला दर्रे पर बनने वाली 4.1 किलोमीटर लंबी सुरंग इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊंचाई के मामले में यह अटल सुरंग से भी ऊपर होगी। शिंकू ला दर्रे पर सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होता है। सुरंग बनने के बाद इस प्राकृतिक बाधा से काफी हद तक निजात मिलेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लद्दाख और लाहौल-स्पीति की कनेक्टिविटी को मौसम की मार से बचाया जा सकेगा। सामरिक दृष्टि से भी यह सुरंग महत्वपूर्ण है, क्योंकि विषम मौसम में भी सैन्य और नागरिक आवाजाही के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध रहेगा।
जांस्कर और लद्दाख में पर्यटन को मिलेगी रफ्तार
बेहतर सड़क और सुरंग संपर्क का लाभ केवल सेना को ही नहीं मिलेगा। NPD एक्सिस के पूरा होने और शिंकू ला सुरंग के निर्माण से जांस्कर घाटी तथा लद्दाख के दूरदराज के इलाकों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सड़क संपर्क बेहतर होने से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर होमस्टे, परिवहन, खान-पान तथा अन्य कारोबार के अवसर पैदा होंगे। इससे सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।
आपदा में भी मोर्चे पर BRO
प्रोजेक्ट योजक नवंबर 2021 में प्रोजेक्ट रोहतांग का नाम बदलकर बनाया गया था। परियोजना के अधिकारी अटल सुरंग के रखरखाव के साथ-साथ आपदा प्रबंधन और आपातकालीन बचाव कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, मार्च 2026 में अटल सुरंग के आसपास भारी बर्फबारी के दौरान फंसे 1,000 से अधिक वाहनों को BRO ने करीब 12 घंटे में सुरक्षित निकाला। इसके अलावा बाढ़ से क्षतिग्रस्त मनाली-कीलॉन्ग मार्ग को भी रिकॉर्ड समय में बहाल किया गया। कठिन परिस्थितियों में BRO के जवानों की लगातार मेहनत से हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और सुरंगों का ऐसा नेटवर्क तैयार हो रहा है, जो एक ओर देश की सामरिक ताकत बढ़ाएगा, वहीं दूसरी ओर लद्दाख और जांस्कर जैसे दूरस्थ इलाकों को वर्ष भर बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगा।