

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : झारखंड के कारोबारी निखिल सबलोक हत्याकांड की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। झारखंड पुलिस ने कोलकाता पुलिस के ट्रैफिक सार्जेंट अयन गुप्ता पर कथित तौर पर हत्या के मास्टरमाइंड राघव को निखिल सबलोक के मोबाइल की टावर लोकेशन उपलब्ध कराने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया है। इस मामले में राघव के करीबी संपर्क में रहने वाली सिविक वॉलेंटियर ट्विंकल दास को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ट्विंकल के अनुरोध पर अयन ने कथित तौर पर कई बार निखिल के मोबाइल की टावर लोकेशन मुहैया कराई थी। अयन गुप्ता बेलियाघाटा ट्रैफिक गार्ड में तैनात थे, जबकि ट्विंकल दास कोलकाता के चावलपट्टी रोड इलाके की रहने वाली है और सिविक वॉलेंटियर के तौर पर काम करती थी।
लालबाजार में घंटों हुई पूछताछ
झारखंड पुलिस की टीम ने दोनों को गुरुवार को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय बुलाया था। डिटेक्टिव डिपार्टमेंट में दोनों से देर शाम तक पूछताछ की गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ की वीडियोग्राफी भी कराई गई। इसके बाद शुक्रवार सुबह दोनों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
24 अगस्त को हुई थी कारोबारी की हत्या
निखिल सबलोक की हत्या 24 अगस्त को झारखंड के चांडिल थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के किनारे एक होटल के सामने हुई थी। पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने उन पर करीब नौ राउंड गोलियां चलाईं। गोली कंधे, पीठ और गर्दन में लगी थी। गंभीर हालत में उन्हें जमशेदपुर के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में हत्या के पीछे कारोबारी दुश्मनी की आशंका जताई गई थी। बाद में जांच आगे बढ़ने पर सुपारी देकर हत्या कराने की बात सामने आई। पुलिस को आशंका है कि वारदात को अंजाम देने के लिए शूटर को करीब 15 लाख रुपये दिए गए थे।
इंटरव्यू के नाम पर मांगी गई थी मोबाइल लोकेशन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ट्विंकल दास के राघव के साथ कथित करीबी संबंध थे। जांच में सामने आया है कि राघव ने निखिल सबलोक के मोबाइल नंबर की टावर लोकेशन मांगी थी। बताया जा रहा है कि लोकेशन हासिल करने के लिए इंटरव्यू से जुड़े काम का हवाला दिया गया था। आरोप है कि ट्विंकल के कहने पर अयन गुप्ता ने निखिल के मोबाइल की टावर लोकेशन कई बार उपलब्ध कराई, जिसे कथित तौर पर राघव तक पहुंचाया गया। अब एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोकेशन की जानकारियों का इस्तेमाल हत्या की साजिश में किस स्तर पर किया गया और वारदात से पहले पीड़ित की गतिविधियों पर किस तरह नजर रखी जा रही थी।