

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने वामदलों की राजनीतिक वापसी की उम्मीदों को झटका दिया है। फलता उपचुनाव में दूसरे स्थान पर रहने के बाद वामपंथी खेमे को राज्य की विपक्षी राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत होने की उम्मीद थी। हालांकि, ताजा नतीजों में दोनों सीटों पर वाम उम्मीदवारों का प्रदर्शन कमजोर रहा।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नंदीग्राम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार शांतिगोपाल गिरि को 5,779 वोट मिले। वहीं, रेजिनगर में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के उम्मीदवार मोहम्मद सईद को केवल 3,797 वोट प्राप्त हुए। दोनों सीटों को मिलाकर वामदलों के खाते में 10 हजार वोट भी नहीं आए।
नंदीग्राम में भाजपा की हसीरानी रथ ने 1,64,427 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की, जबकि रेजिनगर में भाजपा के शखरव सरकार 1,09,834 वोटों के साथ विजयी रहे। इन परिणामों ने वामदलों के जनाधार और संगठनात्मक ताकत पर सवाल खड़े किए हैं।
सीपीएम केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने हार पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि दोनों सीटों पर निष्पक्ष मतदान नहीं हुआ। उन्होंने पुलिस के सहयोग से सत्ताधारी पक्ष द्वारा ‘शांतिपूर्ण धांधली’ किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि भाजपा के खिलाफ देशव्यापी लड़ाई में बंगाल में कौन नेतृत्व कर रहा है, जनता इसे देख रही है।
इन नतीजों के बाद वामदलों के सामने अपना जनाधार मजबूत करने और विपक्षी राजनीति में प्रासंगिकता साबित करने की चुनौती और बढ़ गई है।