

कोलकाता : मध्यमग्राम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद राज्य प्रशासन और केंद्र सरकार अत्यधिक सतर्क हो गई है। इस घटना से सबक लेते हुए प्रशासन मुख्यमंत्री की सुरक्षा में कोई भी चूक नहीं रहने देना चाहता। नवान्न के सूत्रों के अनुसार, फिलहाल कुछ महीनों तक मुख्यमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल, दोनों संयुक्त रूप से संभालेंगे।
केंद्रीय सुरक्षा छोड़ने को तैयार नहीं प्रशासन
दिसंबर 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद से ही शुभेंदु अधिकारी को केंद्रीय सुरक्षा कवच मिला हुआ था। 2021 में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद भी उनकी यह सुरक्षा बरकरार रही। हालांकि, राज्य सरकार ने उस समय भी उनकी सुरक्षा में पुलिस तैनात करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया था। विपक्ष के नेता के रूप में उन पर हुए कई हमलों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें 'जेड श्रेणी' की सुरक्षा प्रदान की थी। शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने तक उनकी सुरक्षा का पूरा जिम्मा केंद्रीय बलों के पास ही था। नवान्न के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘मुख्यमंत्री की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिस तरह से उनके करीबी सहायक को निशाना बनाया गया, उसे देखते हुए हम कोई जोखिम नहीं ले सकते। इसीलिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनकी मौजूदा सुरक्षा को बरकरार रखने का निर्णय लिया है, जबकि राज्य पुलिस की एक विशेष टीम भी उनके साथ तैनात रहेगी।’
बिना किसी बाधा के सुरक्षा समन्वय
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत ज्यादा तामझाम पसंद नहीं है। प्रशासन इस बात का खास ख्याल रख रहा है कि सुरक्षा के कड़े इंतजामों के कारण मुख्यमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों या उनके जनसंपर्क में कोई बाधा न आए। नवान्न के सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को इस तरह से 'री-डिजाइन' किया जा रहा है जिससे सुरक्षा और सहजता के बीच संतुलन बना रहे। फिलहाल, अगले कुछ महीनों तक मुख्यमंत्री एक 'दोहरे सुरक्षा चक्र' में रहेंगे, जो राज्य के इतिहास में एक दुर्लभ समन्वय होगा।