

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मेडिकल कॉलेजों में बुधवार से शुरू हुई सेकेंड प्रोफेशनल MBBS की थ्योरी परीक्षा में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की खामियां सामने आई हैं।
पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (WBUHS) की ओर से निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के बावजूद परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों की फ्रिस्किंग नहीं की गई और न ही केंद्रीय CCTV निगरानी की व्यवस्था थी।
इस लापरवाही पर मेडिकल छात्रों और प्रोफेसरों ने नाराजगी जताते हुए आशंका व्यक्त की कि इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
मोबाइल बंद कराने के बावजूद नहीं हुई परीक्षार्थियों की जांच
कोलकाता के एक मेडिकल कॉलेज के छात्र ने बताया कि परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पहले मोबाइल फोन बंद करने को कहा गया, लेकिन हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर से जांच करने की व्यवस्था नहीं थी। तीन घंटे की परीक्षा के दौरान केंद्रीय CCTV निगरानी भी नहीं की गई।
एक अन्य मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने भी चिंता जताते हुए कहा कि फ्रिस्किंग और केंद्रीय निगरानी के अभाव में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। छात्रों और शिक्षकों ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर निर्धारित नियमों को लागू कराने की मांग की।
स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी के निर्देश पर नई व्यवस्था
मामला सामने आने के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग और WBUHS ने गुरुवार से परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। प्रत्येक केंद्र पर चार पुरुष और चार महिला कर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर से परीक्षार्थियों की जांच करेंगे। छात्राओं की जांच के लिए अलग स्थान भी निर्धारित करना होगा।
इसके अलावा, प्रश्नपत्रों की डिलीवरी CCTV निगरानी में होगी और परीक्षा कक्षों में कैमरे लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह निर्णय स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी के निर्देश पर लिया गया है। डिजिटल निगरानी और फ्रिस्किंग का खर्च विश्वविद्यालय वहन करेगा।
पुरानी एजेंसी का अनुबंध खत्म, नई नियुक्ति में देरी
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि डिजिटल निगरानी व्यवस्था संचालित करने वाली पुरानी एजेंसी का अनुबंध समाप्त हो गया था। नई एजेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण व्यवस्था प्रभावित हुई।
एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विस डॉक्टर्स के महासचिव ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक कार्यालय ने गुरुवार से डिजिटल निगरानी और फ्रिस्किंग लागू करने की जानकारी दी है। आरजी कर आंदोलन के बाद WBUHS ने मेडिकल परीक्षाओं की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय समिति भी बनाई थी। परीक्षा की शुरुआत पैथोलॉजी के पहले प्रश्नपत्र से हुई।
फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी की थ्योरी परीक्षाएं 2 से 6 नवंबर के बीच होंगी, जबकि मौखिक और प्रायोगिक परीक्षाएं 13 से 27 नवंबर तक निर्धारित हैं।