बारिश, महंगी मिट्टी और मजदूरों की कमी के बीच कुम्हारटोली में मूर्तिकारों की बढ़ी चुनौती

पूजा की तैयारियों पर असर
Kolkata
कुम्हारटोली में मूर्तिकारों की बढ़ी चुनौती
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कोलकाता : दुर्गापूजा और गणेश पूजा की तैयारियों के बीच कोलकाता की प्रसिद्ध कुम्हारटोली में मूर्तिकार इन दिनों कई मुश्किलों से जूझ रहे हैं। लगातार हो रही बारिश, मिट्टी की आपूर्ति में देरी, कच्चे माल की बढ़ती कीमत और मजदूरों की कमी ने मूर्ति निर्माण का काम प्रभावित किया है।

इसके बावजूद कलाकार समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत कर रहे हैं। बारिश का सबसे सीधा असर मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को सुखाने की प्रक्रिया पर पड़ा है। कुम्हारटोली मृत्तिशिल्प सांस्कृतिक समिति के सलाहकार के मुताबिक, नमी के कारण प्रतिमाओं के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

कार्यशालाओं में बिजली के पंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन कलाकारों का कहना है कि यह पारंपरिक धूप में सुखाने की प्रक्रिया का विकल्प नहीं है। प्रतिमाएं समय पर नहीं सूखने से रंग-रोगन और सजावट का काम भी पीछे खिसक रहा है।

गीली मिट्टी ने बढ़ाई मजदूरी, चार घंटे का काम अब डेढ़ दिन में

बारिश के कारण मूर्तियों को आकार देने का काम भी सामान्य से काफी धीमा हो गया है। कलाकारों के अनुसार, जिस काम को सामान्य परिस्थितियों में करीब चार घंटे में पूरा किया जाता था, वही अब मिट्टी में नमी रहने के कारण करीब डेढ़ दिन तक खिंच रहा है।

ऐसे में कार्यशाला मालिकों को अतिरिक्त मजदूर लगाने पड़ रहे हैं और ओवरटाइम के लिए लगभग 50 फीसदी तक अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। गणेश पूजा सितंबर के दूसरे सप्ताह में है और उससे पहले मूर्तियों की डिलीवरी करनी है। ऐसे में लगातार बारिश ने मूर्तिकारों की चिंता बढ़ा दी है। साथ ही दुर्गापूजा की प्रतिमाओं का काम भी चल रहा है, जिससे समय का दबाव और बढ़ गया है।

नदी की मिट्टी महंगी, 15 हजार का ट्रक अब 22 हजार में

मूर्ति निर्माण के लिए जरूरी नदी की मिट्टी की कीमत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। मूर्तिकार पशुपति रुद्र पाल के अनुसार, पहले करीब 15 हजार रुपये में मिलने वाली एक ट्रक नदी की मिट्टी अब कम से कम 22 हजार रुपये में मिल रही है। वर्ष की शुरुआत में नदी किनारे की मिट्टी निकालने पर प्रतिबंध के कारण आपूर्ति एक महीने से ज्यादा समय तक प्रभावित रही थी।

आपूर्ति दोबारा शुरू होने के बावजूद उस देरी का असर उत्पादन पर पड़ा है। जूट की रस्सी समेत अन्य कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ी हैं। इन तमाम चुनौतियों के बीच कुम्हारटोली के कलाकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि बारिश और बढ़ती लागत के बावजूद पूजा के लिए प्रतिमाएं समय पर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचाई जाएं।

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