बारिश और मिट्टी के कटाव से उखड़े पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से किया गया पुनःरोपण

वैज्ञानिक तरीके से  उखड़े हुए पेड़ों को पुनःरोपण करने की तस्वीर
वैज्ञानिक तरीके से उखड़े हुए पेड़ों को पुनःरोपण करने की तस्वीर
Published on

कोलकाता: तेज बारिश और मिट्टी के कटाव के कारण जड़ों समेत उखड़े दो पेड़ों को सरसुना सैटेलाइट टाउनशिप कल्चरल एंड चिल्ड्रेन पार्क में मिथ्री मिट्टी ट्रस्ट की टीम ने वैज्ञानिक तरीके से बचाकर दोबारा उसी स्थान पर रोपित कर दिया। ट्रस्ट के अनुसार, पूरी प्रक्रिया करीब दो घंटे में पूरी की गई। अभियान के दौरान पेड़ों को सुरक्षित तरीके से उठाने से लेकर उनकी जड़ों के उपचार और पुनःरोपण तक के लिए विशेष तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। ट्रस्ट के मुताबिक, अभियान की तैयारी सुबह करीब 8 बजे से शुरू कर दी गई थी। पेड़ों के बचाव के लिए ट्री एंबुलेंस को तैयार रखने के साथ रूटिंग हार्मोन, फंगीसाइड, बायो-स्टिमुलेंट और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पहले ही कर ली गई थी। इसके बाद पेड़ों के उखड़े होने की जानकारी मिलते ही बचाव अभियान शुरू किया गया। अभियान के तहत सबसे पहले जेसीबी की मदद से करीब चार फीट गहरा गड्ढा तैयार किया गया। इसके बाद पेड़ों को उनकी जड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित तरीके से उठाने के लिए हाइड्रा मशीन की सहायता ली गई। पेड़ों को उठाने के बाद ट्री एंबुलेंस की मदद से जड़ों की आवश्यक छंटाई की गई और रूटिंग हार्मोन तथा अन्य उपचार सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद दोनों पेड़ों को उसी स्थान पर दोबारा रोपित किया गया।

ट्रस्ट के अनुसार, दोपहर करीब 12:26 बजे पुनःरोपण का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इस अभियान में सहयोग के लिए ट्रस्ट ने सीईएससी (CESC), वनस्पति विशेषज्ञ तथा डीजी पार्क्स एंड स्क्वायर, कोलकाता नगर निगम (KMC) के प्रति आभार व्यक्त किया। ट्रस्ट के मुताबिक, पेड़ों को उठाने के दौरान हाई-टेंशन बिजली लाइन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तत्काल सहयोग उपलब्ध कराने में सीईएससी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, वनस्पति विशेषज्ञ ने जड़ों के उपचार और पेड़ों के दोबारा जीवित रहने की संभावनाओं को लेकर वैज्ञानिक मार्गदर्शन दिया। शहरी क्षेत्र में पेड़ों के संरक्षण के इस प्रयास में डीजी पार्क्स एंड स्क्वायर, केएमसी की ओर से भी सहयोग और प्रोत्साहन मिला। पूरे अभियान की निगरानी मिथ्री मिट्टी ट्रस्ट के संस्थापक संजय जयसिंह ने की। वह बचाव अभियान के दौरान मौके पर मौजूद रहे।

संजय जयसिंह ने कहा, “ये दोनों पेड़ मृत नहीं थे, बल्कि उन्हें बचाए जाने की जरूरत थी। हमारे पास ट्री एंबुलेंस तैयार थी और पूरे अभियान का खर्च हमने स्वयं उठाया। हालांकि, सीईएससी, वनस्पति विशेषज्ञ और डीजी पार्क्स एंड स्क्वायर के सहयोग के बिना यह बचाव अभियान संभव नहीं होता। इस तरह कोलकाता में उखड़े हुए हर पेड़ को बचाया जा सकता है।”

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in