फाइल फोटो
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''''''''सांसद के कहने पर फंड में जमा कराए थे पैसे''''''''

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टीएमसी सांसद के PA सुमित रॉय को 5 दिन की CID कस्टडी

कोलकाता :

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) सुमित रॉय और तीन अन्य आरोपियों को शनिवार को मिदनापुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने 5 दिनों की CID कस्टडी में भेज दिया। जांच एजेंसी सीआईडी ने कोर्ट में सुमित की 7 दिनों की कस्टडी मांगी थी, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने 5 दिनों की रिमांड मंजूर की। सुमित इससे पहले 8 दिनों तक पुलिस हिरासत में रह चुका है।

CID का फॉरवर्डिंग लेटर और खुलासे

सीआईडी ने आरोपियों को अदालत में पेश करते हुए अपने फॉरवर्डिंग लेटर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 180 के तहत दर्ज बयान का हवाला दिया। एजेंसी ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान सुमित रॉय ने स्वीकार किया है कि उसने अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर ही पार्टी फंड में रकम जमा की थी। सुमित के मुताबिक, यह राशि उसे पार्टी के कैशियर टी. घोष ने दी थी। हालांकि, उसने सरकारी जमीन के कथित घोटाले से किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन से इनकार किया है और कहा कि वह केवल संगठनात्मक कार्यों से मिदनापुर गया था। एपीपी (APP) सैयद नाजिम हबीब ने बताया कि जांचकर्ताओं ने सुमित के पास से 5 मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। अदालत ने सीआईडी को पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) दाखिल करने और आगे की पूछताछ जारी रखने की अनुमति दे दी है।

जमानत अर्जी और बचाव पक्ष की दलीलें

अदालत की कार्यवाही के दौरान शुरुआत में सुमित की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। हालांकि, एपीपी हबीब ने कहा कि अदालत ने अर्जी को खारिज कर दिया है। बचाव पक्ष के वकील ने सुमित की अनिद्रा (नींद की बीमारी) की दवा जारी रखने और वकील से मिलने का समय 20 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने का अनुरोध किया। कोर्ट ने दवा संबंधी निर्देश को बरकरार रखा, लेकिन वकील से मुलाकात की समयावधि बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान सुमित की पत्नी सुष्मिता घोष रॉय ने भी कोर्टरूम में उनसे मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य और खान-पान का हाल जाना। अन्य दो आरोपियों—लक्ष्मी भुइयां और अमित घोष—की तरफ से बहस करते हुए एडवोकेट मृणाल चौधरी ने कहा कि उनके मुवक्किलों को झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने केवल ब्रोकरेज फीस ली थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सीआईडी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि लक्ष्मी को कथित तौर पर कितनी राशि मिली थी।
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