सीबीआई अधिकारी बनकर रिटायर्ड अधिकारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’, 49 लाख की ठगी

वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर तीन दिन तक घर में रखा ‘कैद’,
फा‌इल फोटो
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विधाननगर : न्यू टाउन इलाके के एक 69 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी अधिकारी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के ताजा शिकार बने हैं। आरोप है कि साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताकर उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर डराया-धमकाया और एक मनगढ़ंत आपराधिक मामले में गिरफ्तार करने की धमकी दी। आरोप है कि फर्जी अरेस्ट वारंट और नोटिस दिखाकर उन्हें तीन दिनों तक घर में कैद रखा गया। ठगों ने पीड़ित पर एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह से जुड़े आरोपी सदाकत खान से संबंध होने का झूठा आरोप लगाया। पीड़ित ने शनिवार को विधाननगर साइबर क्राइम थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।

क्या है पूरा मामला

पुलिस सूत्रों के अनुसार न्यूटाउन के रहनेवाले पीड़ित ने बताया कि 14 से 16 जनवरी के बीच उन्हें लगातार व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव में रखा गया और व्यवहारिक रूप से घर में ही डिजिटल अरेस्ट कर दिया गया। कॉल करने वालों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क कर खुद को सीबीआई और ईडी का अधिकारी बताया। शिकायत के अनुसार, ठगों ने दावा किया कि मुंबई स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा में पीड़ित के नाम पर एक बैंक अकाउंट खोला गया है, जिसे कथित तौर पर मानव तस्करी के आरोपी सदाकत खान ऑपरेट कर रहा था। पीड़ित पर अवैध धन लेने, पैन कार्ड के दुरुपयोग और आपराधिक गतिविधियों में मदद करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। डर का माहौल बनाने के लिए उन्हें जाली अदालत के दस्तावेज और एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेजा गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़ित को कथित रूप से ईडी की ओर से जारी एक मनगढ़ंत नोटिस भेजा गया। इसके बाद ईडी और आरबीआई के अधिकारी बनकर कॉल करने वालों ने कहा कि उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया है और यदि उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। पीड़ित ने शिकायत में लिखा, ‘उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश को प्राथमिकता देने और केस निपटाने के लिए मेरे खाते की जांच जरूरी है। 16 जनवरी को मुझे दो घंटे के भीतर 50 लाख रुपये जमा करने को कहा गया, नहीं तो मेरी जान खतरे में होगी। मैं पूरी तरह डर गया और अपनी मेहनत की कमाई निकाल ली। घबराहट इतनी थी कि मैंने अपनी पत्नी को भी नहीं बताया और आरटीजीएस कर दिया।’ ठगों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया था कि सत्यापन के बाद 30 मिनट के भीतर रकम वापस कर दी जाएगी। जब पैसे वापस नहीं आए तो उन्हें संदेह हुआ। एक मित्र से सलाह लेने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

विधाननगर सिटी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे कई ठगी सीमा पार साइबर सिंडिकेट द्वारा संचालित किए जाते हैं। चोरी की गई रकम को पहले भारत में कई फर्जी खातों के जरिए घुमाया जाता है और फिर थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और चीन जैसे देशों में भेज दिया जाता है। कई मामलों में सबूत मिटाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का भी इस्तेमाल किया जाता है।

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