कोलकाता : तारातला गोदाम हादसे के बाद पिछले 72 घंटों से कंक्रीट और मुड़े हुए स्टील के मलबे के बीच चल रहा बेहद चुनौतीपूर्ण खोज और बचाव अभियान शनिवार को लगभग पूरा हो गया। मलबे के नीचे अब किसी भी और जिंदगी या शव के फंसे होने की गुंजाइश न के बराबर है। इसके साथ ही अब प्रशासन का पूरा ध्यान लोगों को बचाने से हटकर कोलकाता की इस सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटना के कारणों का पता लगाने पर केन्द्रित हो गया है। इस हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 17 अन्य घायल हैं। शनिवार को नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) के पूरी तरह हटने और सेना द्वारा अभियान को औपचारिक रूप से कम करने के बाद, जांचकर्ताओं ने दुर्घटनास्थल को अपने नियंत्रण में लेने की कवायद शुरू कर दी है। अगले कुछ दिनों में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यडी) और कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (केएमसी) के इंजीनियर भारी मशीनों के जरिए मलबे को हटाने का काम शुरू करेंगे।
मलबे को हाथ लगाने से पहले सबूत सुरक्षित करेगी एसआईटी
लालबाजार के अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) अगले दो दिनों में आधिकारिक रूप से इस जगह का जिम्मा संभाल लेगी। चूंकि जांच अब अपने सबसे अहम चरण में है, इसलिए एसआईटी फॉरेंसिक जांच टीमों के साथ मिलकर काम करेगी। अगले हफ्ते मलबा हटाने का काम शुरू होने से पहले ही, स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के अधिकारियों के रविवार को मौके पर पहुंचने की उम्मीद है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स घटनास्थल से टूटे हुए कंक्रीट, बीम, स्टील रॉड, नट-बोल्ट, मिट्टी और खून के धब्बों के नमूने (सैंपल्स) इकट्ठा करेंगे ताकि मटीरियल की क्वालिटी और लापरवाही की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
हाई-टेक कैमरे और कटर समेटे गए, मेडिकल टीम अब भी तैनात
शनिवार को ग्राउंड जीरो पर एनडीआरएफ के जवान ऑक्सी-कटर, प्लाज्मा-कटर, थर्मल इमेजिंग कैमरे और इन्फ्रारेड लाइफ-डिटेक्शन डिवाइस जैसे अपने अत्याधुनिक उपकरण समेटते नजर आए। ईस्टर्न रेलवे के सेक्शन इंजीनियर तरुण कुमार मंडल ने बताया कि कटर मशीनों के लिए एनडीआरएफ ने रेलवे से भी संपर्क किया था। एनडीआरएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘शनिवार सुबह हमें हटने के आदेश मिले। पिछले तीन दिनों में हमने हवा के बहाव के लिए मलबे के बीच कई वर्टिकल शाफ्ट (रास्ते) खोदे थे। अब किसी के जीवित होने की संभावना नहीं है।’ वहीं बिहार रेजिमेंट के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, ‘लाइफ-डिटेक्शन उपकरणों से जांच में किसी भी जीवन या सड़े-गले शव का संकेत नहीं मिला है।’ हालांकि, सेना की एक मेडिकल टीम किसी भी 'चमत्कारिक बचाव' की स्थिति के लिए अब भी एम्बुलेंस के साथ मौके पर मुस्तैद है।
केएमसी के लाइसेंस्ड बिल्डिंग सर्वेयर्स (एलबीएस) से होगी पूछताछ
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘खोज और बचाव हमारी प्राथमिकता थी, जो पूरी हो चुकी है। अब जांच में तेजी आएगी।’ सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने केएमसी के लाइसेंस्ड बिल्डिंग सर्वेयर्स (एलबीएस) को पूछताछ के लिए तलब किया है। ये वे अधिकृत सिविल इंजीनियर और आर्किटेक्ट होते हैं जो बिल्डिंग प्लान का सर्वे और उसे मंजूरी देते हैं। जांच दल यह पता लगाएगा कि इस खतरनाक गोदाम के निर्माण के लिए मंजूरी किस आधार पर और किन शर्तों के तहत दी गई थी।