

कोलकाता : साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए अब बैंक खातों को भी किराये पर लेने का तरीका अपना लिया है।
ऐसे खाताधारकों को कुछ रकम या कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और अन्य बैंकिंग विवरण हासिल किए जाते हैं। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम के लेन-देन के लिए किया जाता है।
कमीशन के लालच में खाते उपलब्ध कराने का आरोप
सूत्रों की माने तो, साइबर गिरोह ऐसे लोगों की तलाश करता है, जो अपने बैंक खाते दूसरों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा सकें। बदले में उन्हें निश्चित रकम या लेन-देन के आधार पर कमीशन देने का वादा किया जाता है।
खाते में ठगी की रकम आने के बाद उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है या अन्य माध्यमों से निकाल लिया जाता है। इस तरह वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाता है।
एनसीआरपी की सूचना के बाद जांच तेज
सूत्रों का दावा है कि कुछ दिन पहले ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP) से राज्य पुलिस की साइबर अपराध शाखा को संदिग्ध बैंक खातों और उनमें हुए बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली थी। इसके बाद अधिकारियों ने खातों की गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।
इसके तहत लेन-देन के पैटर्न, खाताधारकों की भूमिका और रकम के स्रोत की पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल बड़े साइबर ठगी नेटवर्क के हिस्से के तौर पर किया गया हो सकता है।