राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा महोत्सव में जूट कैलेंडर बना आकर्षण का केंद्र

पूरी तरह प्राकृतिक और ईको-फ्रेंडली उत्पाद प्रोजेक्ट में आईसीएआर–निनफेट का भी तकनीकी सहयोग मिला अनूठे डिजाइन और पर्यावरण के अनुकूल विशेषताओं के कारण हो रही है खास चर्चा
जूट कैलेंडर
जूट कैलेंडर
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रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता स्थित आईसीएआर–निनफेट द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा महोत्सव में इस बार एक अनोखा उत्पाद लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शांतिनिकेतन क्राफ्ट कॉटेज के स्टॉल में प्रदर्शित जूट से बना कैलेंडर पहली बार इस महोत्सव में पेश किया गया है, जिसे देखने और इसके बारे में जानने के लिए बड़ी संख्या में लोग स्टॉल पर पहुंच रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार 3 जनवरी से राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा महोत्सव का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर जूट कैलेंडर अपने अनूठे डिजाइन और पर्यावरण के अनुकूल विशेषताओं के कारण खास चर्चा में है। स्टॉल पर आने वाले दर्शक न सिर्फ इसे देख रहे हैं, बल्कि इसके निर्माण की प्रक्रिया और उपयोगिता के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं।

सुस्मिता चक्रवर्ती जूट कैलेंडर दिखाती हुईं
सुस्मिता चक्रवर्ती जूट कैलेंडर दिखाती हुईं

जूट से बना ईको-फ्रेंडली कैलेंडर, कचरा नहीं बल्कि प्रकृति का हिस्सा

इस जूट कैलेंडर के अनोखे आइडिया के बारे में शांतिनिकेतन क्राफ्ट कॉटेज की प्रमुख सुस्मिता चक्रवर्ती ने बताया कि यह पूरी तरह प्राकृतिक और ईको-फ्रेंडली उत्पाद है। उन्होंने बताया कि जूट फाइबर को रोलर टाइप मशीन में प्रोसेस कर कंपोस्टेबल शीट तैयार की जाती है। इसके बाद उस पर स्क्रीन प्रिंटिंग की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 3 से 4 दिन का समय लगता है। आगे उन्होंने यह आइडिया आईसीएआर–निनफेट के साथ साझा किया था, जिसके बाद संबंधित संस्थाओं के सहयोग से इस पर काम शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट में आईसीएआर–निनफेट का भी तकनीकी सहयोग मिला। उन्होंने आगे बताया कि यह जूट कैलेंडर गिफ्ट आइटम के रूप में काफी पसंद किया जा रहा है। खासकर कॉरपोरेट सेक्टर के लोग इसे बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं। इसकी खास बात यह है कि यह न सिर्फ घरों की लाइफस्टाइल को सजाता है, बल्कि एक साल बाद यह बेकार कचरा नहीं बनता। उपयोग के बाद यह आसानी से पर्यावरण में घुल-मिल जाता है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक लोग इस जूट कैलेंडर की सराहना कर रहे हैं। यह उत्पाद प्राकृतिक रेशों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ टिकाऊ जीवनशैली का संदेश भी दे रहा है।

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