

कोलकाता : पिछले वर्ष आरजी कर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद शुरू हुआ महिलाओं का 'रात दखल' (Reclaim the Night) आंदोलन एक बार फिर सड़कों पर लौट रहा है। इस बार आंदोलन की पृष्ठभूमि बारुईपुर के सूर्यपुर में नाबालिग से कथित दुष्कर्म एवं हत्या की घटना है, जिसने पूरे राज्य में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है।
सोशल मीडिया और विभिन्न नागरिक संगठनों ने 10 जुलाई की रात जादवपुर के 8बी बस स्टैंड से 'रात दखल' कार्यक्रम का आह्वान किया है। आंदोलन का संदेश है— "और कितनी रातें जागनी होंगी? और कितनी लाशें उठानी होंगी?"
आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक घटना के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, त्वरित न्याय और सार्वजनिक स्थानों पर उनके समान अधिकार की मांग का प्रतीक बन चुका है। उनका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ती हिंसा और न्याय में देरी ने लोगों को फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।
पिछले वर्ष आरजी कर आंदोलन के दौरान हजारों महिलाएं, छात्र-छात्राएं, कलाकार और आम नागरिक रात में सड़कों पर उतरे थे। आयोजकों का मानना है कि बारुईपुर की घटना ने उसी जनभावना को फिर से जीवित कर दिया है।
उनका कहना है कि जब तक महिलाओं के खिलाफ अपराध नहीं रुकेंगे और पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिलेगा, तब तक 'रात दखल' केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिरोध और नागरिक चेतना का सशक्त अभियान बना रहेगा।