प्रोटोकॉल विवाद : खगेन मुर्मु ने कहा – यह आदिवासी समाज का अपमान है

मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की
खगेन मुर्मु
खगेन मुर्मु
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हालिया दौरे को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर मालदह उत्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद तथा भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष खगेन मुर्मु ने एक प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान राज्य सरकार का व्यवहार संवैधानिक प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था और इससे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के साथ-साथ पूरे आदिवासी समाज का अपमान हुआ है। खगेन मुर्मु ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति देश के 140 करोड़ नागरिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं और जब वे किसी राज्य के दौरे पर आते हैं तो उनका स्वागत करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल पहुंचने पर न तो मुख्यमंत्री हवाई अड्डे पर मौजूद थीं और न ही राज्य सरकार का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि उनका स्वागत करने पहुंचा। उनके अनुसार यह घटना पश्चिम बंगाल के लिए बेहद शर्मनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सिलीगुड़ी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने आई थीं, जो किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं था। इसके बावजूद सम्मेलन के लिए निर्धारित स्थल को अनुमति नहीं दी गई और कार्यक्रम स्थल बार-बार बदला गया, जिसके कारण अंततः कार्यक्रम को बागडोगरा में आयोजित करना पड़ा। खगेन मुर्मु ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार लंबे समय से आदिवासी समाज को वास्तविक सम्मान देने के बजाय उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रही है। उन्होंने फांसीदेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासियों के साथ अत्याचार और उपेक्षा की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट तलब किया जाना उचित कदम है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए।

ममता बनर्जी से मांगा इस्तीफा

इसके साथ ही खगेन मुर्मू ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुआ व्यवहार उनका अपमान है। खगेन मुर्मू ने कहा कि राष्ट्रपति आदिवासी समाज से आती हैं, इसलिए यह पूरे आदिवासी समुदाय के सम्मान का भी मुद्दा है। उन्होंने कहा कि केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं है और मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

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