महालनोबिस जयंती पर ISI बिल का विरोध

लोकतांत्रिक ढांचा खत्म होने का आरोप
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कोलकाता : भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई), कोलकाता के प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों ने संस्थान के संस्थापक प्रशांत चंद्र महालनोबिस की 133वीं जयंती पर केंद्र सरकार के प्रस्तावित ISI विधेयक का विरोध किया। उनका आरोप है कि यह विधेयक संस्थान की लोकतांत्रिक और स्वायत्त शासन व्यवस्था को कमजोर कर देगा।

थ्योरिटिकल स्टैटिस्टिक्स एंड मैथमैटिक्स यूनिट (टीएसएमयू) की सहायक प्रोफेसर परमिता दास ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के तहत परिषद (काउंसिल) का आकार घटाकर मंत्रालय द्वारा नामित सदस्यों वाले बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को व्यापक अधिकार दिए जाएंगे। इससे संस्थान के वैज्ञानिक विभागों का प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सुधार चाहती है तो सभी हितधारकों से चर्चा कर सुझाव लेने चाहिए। उनका आरोप था कि बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के तैयार विधेयक संस्थान की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट कर देगा।

आईएसआई वैज्ञानिक और इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन (आईएसआईडब्ल्यूओ) के अध्यक्ष पार्थ पी. मोहंता ने कहा कि यह विधेयक महालनोबिस द्वारा स्थापित सोसायटी आधारित ढांचे को समाप्त कर आईएसआई को एक कॉरपोरेट निकाय में बदलने का प्रयास है। उन्होंने इसे संस्थान की विरासत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

उधर,आईएसआई के निदेशक अमर्त्य कुमार दत्ता ने अपने संबोधन में संस्थान की शोध उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली में यह धारणा बन गई है कि आईएसआई पहले जैसा नहीं रहा। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित आईएसआई विधेयक संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

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