शरणागत की रक्षा करना भगवान राम के स्वभाव का मूल गुण: पुरुषोत्तम तिवारी

जो व्यक्ति सच्चे मन से राम की शरण में आता है, उसे वे स्वीकार करते
Kolkata
श्रीराम कथा सुंदरकांड
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कोलकाता: भगवान श्रीराम के चरित्र में शरणागत की रक्षा और उसे भयमुक्त करने का भाव प्रमुख है। गृहस्थ पुरुषोत्तम तिवारी ने सुंदरकांड पर प्रवचन के दौरान कहा कि भगवान राम के जीवन का संदेश है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसे वे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि विभीषण जब छल-कपट छोड़कर श्रीराम की शरण में पहुंचे, तो भगवान ने उन्हें तत्काल अपनाकर लंका का राजा बनाने का निर्णय लिया।

यह विचार सत्संग भवन ट्रस्ट मंडल एवं स्वामी विश्वदेवानंद चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान व्यक्त किए गए। कथा का आयोजन पद्मश्री से सम्मानित साहित्यकार डॉ. कृष्णबिहारी मिश्र की स्मृति में सत्संग भवन के स्वामी कृष्णानंद सभागार में किया गया।

प्रवचन में पुरुषोत्तम तिवारी ने कहा कि श्रीराम की शरणागति नीति में किसी के पूर्व कर्मों के आधार पर भेदभाव नहीं है। उन्होंने विभीषण प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान राम के करुणामय और लोककल्याणकारी स्वरूप से परिचित कराया।

कार्यक्रम के दौरान मेधावी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। समारोह में विधायक विजय ओझा, महावीर बजाज, बंशीधर शर्मा, कृष्ण कुमार खंडेलवाल, प्रदीप धानुक, दिव्या प्रसाद, परमजीत पंडित, अमित गुप्ता, राजू शर्मा, अभय पांडेय, अशोक तिवारी और सुनील दीक्षित सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महावीर प्रसाद रावत ने किया।

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