

कोलकाता : विधानसभा में तृणमूल (ममता गुट) कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष के खिलाफ शुक्रवार को विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज) प्रस्ताव पेश किया गया। संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने आरोप लगाया कि कुणाल ने जानबूझकर अध्यक्षीय आसन की गरिमा को ठेस पहुंचाई, इसलिए उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
प्रस्ताव पेश होने के बाद स्पीकर रथींद्र बोस ने कुणाल घोष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। इस पर भाजपा विधायक बंकिम घोष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष में रहने के दौरान उन्हें ऐसा अवसर कभी नहीं मिला था। अपने जवाब में कुणाल घोष ने कहा कि उनका कभी भी स्पीकर या अध्यक्षीय आसन का अपमान करने का इरादा नहीं था।
यदि उनके व्यवहार से ऐसा आभास हुआ है तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके गुट के विधायकों के नाम चर्चा की सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे यह स्थिति पैदा हुई है। इस पर शंकर घोष ने स्पष्ट किया कि वक्ताओं की सूची तय करना विपक्ष के मुख्य सचेतक का अधिकार है और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पीकर ने कहा कि मामला उनके विचाराधीन है और उचित समय पर फैसला सुनाया जाएगा। सदन के बाहर कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि विशेषाधिकार प्रस्ताव के जरिए उनकी विधायकी समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा और जनता के मुद्दे उठाने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि उन्होंने न तो स्पीकर और न ही सदन का कोई अपमान किया है।